प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट के समक्ष - Page 27

10 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

धारा 360

जैसे ही हर एक साक्षी के साक्ष्य का लिखा जाना पूर्ण हो जाए, वह अभियुक्त की उपस्थिति में यदि वह हाजिर है या उसके अधिवक्ता की उपस्थिति में यदि वह अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होता है, पढ़ा जाए और यदि आवश्यक है तो यह सही किया जाए।

जब साक्ष्य पढ़ा जाता है और साक्षी साक्ष्य के किसी भाग की शुद्धता अस्वीकार करता है तो मजिस्ट्रेट या सत्र न्यायाधीश साक्ष्य को सही करने के स्थान पर साक्षी के द्वारा किए गए प्रतिवादों का एक ज्ञापन बना सकता है और ऐसी टिप्पणी सम्मिलित करेगा जैसी वह आवश्यक समझता है।

पढ़े जाने को छोड़ देना एक अवैधता है।

II प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट के समक्ष

धारा 362

अपीलीय मामले एवं अनअपीलीय मामले।

अपीलीय मामलों में-

मजिस्ट्रेट साक्षी के साक्ष्य को अपने हाथ से लिखेगा या खुले न्यायालय में बोलकर लिखवाएगा।

इस प्रकार लिखा गया सकल साक्ष्य मजिस्ट्रेट द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा और अभिलेख का अंग बनेगा।

मजिस्ट्रेट अभियुक्त के परीक्षण के सार का ज्ञापन बनाएगा। ऐसा ज्ञापन मजिस्ट्रेट द्वारा उसके अपने हाथ से हस्ताक्षरित किया जाएगा और अभिलेख का एक अंग होगा।

अनअपीलीय मामलों में -

प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट के लिए साक्ष्य को अभिलिखित करना या आरोप बनाना आवश्यक नहीं होगा।

धारा 359, 362(2)

साक्ष्य लेखबद्ध करने का ढंग

साक्ष्य साधारणतया विवरणात्मक रूप में लिखा जाएगा यद्यपि न्यायालय अपने विवेकानुसार किसी विशेष प्रश्न और उत्तर को लिखेगा या लिखवाएगा।

अपवाद - अभियुक्त की परीक्षा