भाग - IV आन्वयिक न्यास - Page 269

252 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

न्यास में धारण करता है जिसने मूल्य चुकाया है, एक मामले के सिवाए सामान्यतः

लागू होता है।

  1. अपवादः-

यह नियम वहां लागू नहीं होता है जहां उस व्यक्ति के मन में लाभग्राही को लाभ देने का आशय है, जो मूल्य चुकाता है।

  1. आशय का सबूत

(iii) अविधिक प्रयोजन के लिए अंतरण।

धारा 84

  1. साधारणतः जब अंतरण अविधिक प्रयोजन के लिए है तो न्यायालय न तो संपादन

को अंतरिती के पक्ष में प्रवर्तित करेगा न अंतरणकर्ता की संपदा, यदि वह उसको

दे चुका है, की वापसी में सहायता करेगा।

  1. किंतु यह नियम सभी परिस्थितियों में लागू नहीं होता है। परंतु यह नियम कुछ

परिस्थितियों में अवश्य लागू होता है।

  1. वे परिस्थितियां क्या हैं जिनमें नियम लागू नहीं होता है?

वे परिस्थितियां जिनमें नियम लागू नहीं होता है ये हैंः-

(i) यदि प्रयोजन निष्पादित नहीं किया जाता है।

(ii) यदि अंतरक ऐसा दोषी नहीं जैसा अंतरिती है।

(iii) यदि अंतरिती को संपत्ति के प्रति धारण के लिए अनुमत करना किसी विधि के प्रावधानों को विफल करना हो सकता है।

  1. इन मामलों में न्यायालय अंतरक की सहायता करेगा और अंतरिती पर एक दायित्व,

अंतरक के लाभार्थ संपत्ति को धारण करने पर, आरोपित करेगा।

(iv) अवैध प्रयोजन के लिए न्यास पर वसीयत।

धारा - 85

  1. अवैध प्रयोजन के लिए अंतरणों की स्थिति अवैध प्रयोजन के लिए न्यास

के समान होती है।

  1. अर्थात् न्यायालय न तो अनुलाभित होने के लिए आशयित पक्षों के पक्ष में

न्यास प्रवर्तन करेगा न वह व्यवस्थापक की संपदा के प्रत्युद्धरण करने में

सहायता करेगा यदि उसने उसे अलग कर दिया है।

9 बी.ओ.एम.एस.आर. 542

  1. धारा 85 न्यास को मान्यता प्रदान करती है भले ही प्रयोजन अवैध है, यह

संविदा अधिनियम की धारा 4 में प्रतिपादित सामान्य सिद्धांत के विपरीत है।

अतः कुछ व्याख्या की अपेक्षा है।