भाग - IV आन्वयिक न्यास - Page 272

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III. धारा 89

  1. तीसरा मामला वहां उद्भूत होता है, जहां अनुचित प्रभाव डालकर किसी अन्य

व्यक्ति के मूल्य पर लाभ प्राप्त किया जाता है।

  1. यह धारा 89 में है। धारा 99 में व्यक्त है कि ऐसा व्यक्ति निश्चितता से

लाभ को उस व्यक्ति के लाभ के लिए धारण करे जो अनुचित प्रभाव का

शिकार है।

  1. यह दो परिसीमाओं के अधीन है -

(i) लाभ बिना प्रतिफल के लिया गया है। या

(ii) उस व्यक्ति को अनुचित प्रभाव से लिए गए लाभ की सूचना हो।

धारा - 90

  1. चौथा मामला वहां उद्भूत होता है, जहां एक योग्य स्वामी के द्वारा संपत्ति में

हितबद्ध अन्य व्यक्तियों के अधिकारों के अल्पीकरण में अपनी स्थिति को

लाभ उठा कर प्राप्त किया जाता है।

  1. इसका उल्लेख धारा 90 में किया गया था। धारा 90 में व्यक्त है कि जिसने

उसे उपलब्ध किया था के लाभ के लिए नहीं।

  1. यह दो परिसीमाओं के अधीन है -

(i) अन्य लोग ऐसे लाभ को प्राप्त किए जाने के लिए उचित रूप से किए

गए व्यय के अपने अंश अदा करें

(ii) अन्य लोग ऐसे लाभ को उठाने के लिए उपयुक्ततः संविदागत अपने

दायित्वों के अनुपातिक भाग को अवश्य सहन करें।

  1. इसमें सह किराएदारों, संयुक्त परिवार के सदस्यों, बंधकदारों आदि के मामले

आते हैं।

धारा - 93

  1. पांचवां मामला वहां उद्भूत होता है जहां साहूकार द्वारा गुप्त रूप से फायदा

उठाया गया है।

  1. ऐसा मामला सामान्यतः तब उद्भूत होता है, जब साहूकार देनदार से एक रचना

स्वीकार करता है, जो अपने ऋणों को पूर्ण रूपेण अदा करने अयोग्य है। 3. यदि यह पाया जाता है कि लेनदारों में से एक जो रचना में एक पक्ष है, अन्य

देनदारों के लिए अनजान देनदार के साथ व्यवस्था द्वारा स्वयं के लिए श्रेष्ठतर

शर्तें प्राप्त करता है, वह जो अन्य लेनदारों के लिए ईर्ष्या करके ऐसी श्रेष्ठतर

शर्तों के कारण उसके द्वारा प्राप्त लाभ को रखने के लिए हकदार नहीं होगा। 4. जहां तक उसके द्वारा प्राप्त लाभ का संबंध है, विधि उसको अन्य लेनदारों

के एक न्यासी के रूप में मानेगी।