भारतीय न्यास अधिनियम - Page 277

260 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. यह लाभकारी उपयोग रहित स्वामित्व है। इसमें स्वामित्व एवं लाभकारी उपभोग

अंतर्गस्त हैं।

  1. न्यासी स्वामी में विश्वास रखने एवं उसके द्वारा स्वीकार करने पर उद्भूत होता

है।

  1. स्वामी विधि की दृष्टि से न्यासी है। न्यास के सृजन के बाद न्यास रचयिता संपत्ति

का स्वामी नहीं रहता है।

  1. न्यास क्या है

  2. न्यास शब्द एवं न्यासी शब्द भारतीय विधान मंडल के बहुत से अधिनियमों में परिभाषित किए गए हैं।

(I) 1877 के अधिनियम सं. 1 विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम में परिभाषा।

धारा 3

(1) बाध्यता के अंतर्गत विधि के द्वारा प्रवर्तनीय प्रत्येक कर्त्तव्य है। (2) न्यास में प्रत्येक प्रकार के अभिव्यक्त विवक्षित या आन्वयिक विवाक्षित स्वामित्व

सम्मिलित है।

(3) न्यासी में अभिव्यक्त या विवक्षित रूप से या आन्वयिक रूप से वैश्वासिक स्वामित्व

को धारण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति सम्मिलित है।

(II) भारतीय न्यासी 1866 के अधिनियम सं. XXVII में परिभाषा।

धारा 2

फ्न्यास का अभिप्राय बंधक के द्वारा हस्तांतरित संपदा के आनुषंगिक कर्त्तव्य नहीं होगा किंतु इस अपवाद के साथ न्यास एवं न्यासी शब्द का विस्तार में विवक्षित एवं आन्वयिक न्यासों तक होगा एवं वे इनमें सम्मिलित होंगे और एक मृत व्यक्ति के निष्पादक या प्रशासक पद के आनुषंगिक कर्त्तव्यों तक होगा एवं इनमें सम्मिलित होंगे।य्

(III) परिभाषा परिसीमा 1908 के अधिनियम सं. IX

धारा 2 ( II )

न्यासी में बेनामीदार बंधकी बंधक चुकता हो जा कब्जा या बिना हक के सकब्जा दोषी सम्मिलित नहीं है।

(4) भारतीय न्यास 1872 के अधिनियम सं. II

(1) धारा 3 न्यास, संपत्ति के स्वामित्व से उपाबद्ध एवं बाध्यता है।

(2) न्यास के अवयव