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(i) बाध्यता में न्यास।
(ii) दायित्व संपत्ति के स्वामित्व से अवश्य जुड़ा हो।
(iii) स्वामित्य, स्वामी में रखे गए एवं स्वीकृत विश्वास से अवश्य उद्भूत होना चाहिए।
(iv) स्वामित्व एक अन्य व्यक्ति के लाभ के लिए अर्थात् स्वामी से भिन्न व्यक्ति या एक अन्य व्यक्ति एवं स्वामी के लिए हो।
शब्दों (वायदों) का स्पष्टीकरण
I. बाध्यता अवश्य होनी चाहिए।
II. बाध्यता अवश्य स्वामित्व की संपत्ति से जुड़ी होनी चाहिए।
(1) बाध्यता ऐसी हो सकती है जिसके अधीन कोई व्यक्ति है यद्यपि कोई संपत्ति नहीं है जिससे वह संबद्ध है।
(2) संपत्ति उससे संबद्ध किसी बाध्यता के बिना भी हो सकती है। जैसे भरपूर एवं पूर्ण स्वामित्व - संपत्ति का विक्रय।
III. संपत्ति का स्वामित्व विश्वास में पाया जा सकता है या नहीं पाया जा सकता है।
दृष्टांतः-
कोई व्यक्ति स्वामित्व को संपत्ति के उपभोग करने के अधिकार को उसे देने के आशय के साथ अंतरित करता है।
कोई एक व्यक्ति स्वामित्व को संपत्ति के उपभोग करने के अधिकार को उसे दिए बिना अंतरित कर सकता है।
विश्वास में आधारित स्वामित्व और विश्वास में आधारित स्वामित्व के बीच अंतर होता है-
(i) परवर्ती में जसइबरी (एक वस्तु के प्रति पूरा एवं पूर्ण अधिकार) या जस एंड रेम (एक अपक्व एवं अपूर्ण अधिकार)
(ii) पूर्ववर्ती में नहीं है।
जैसे उपनिधान।
- न्यास की प्रकृति न्यास के सदृश अन्य संव्यवहारों के साथ उसे उसकी तुलना करके अधिक अच्छी तरह समझी जा सकती है।
न्यास अभिकरण से प्रभेदित
- जहां न्यास है, न्यास संपत्ति का स्वामित्व न्यासी का होता है। न्यासी द्वारा न्यास