भारतीय न्यास अधिनियम - Page 279

262 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

से संदर्भित की गई सभी संविदाओं के प्रति व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होता है, यद्यपि उसका न्यास निधि या लाभग्राही के प्रति उपाश्रय का अधिकार हो सकता है।

  1. एक अभिकर्त्ता को सौंपे गए माल में विधि के अनुसार कोई स्वामित्व नहीं होता है। यदि अभिकर्ता कोई संविदा अभिकर्त्ता के रूप में करता है तो, वह व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी नहीं है। संविदा स्वामी के साथ होती है।

न्यास शर्त से प्रभेदित

  1. शर्त के मामले न्यास के मामलों से दो बातों में भिन्न होते हैं -

(i) न्यास संपत्तिकार स्वामी के सिवाए किसी अन्य व्यक्ति द्वारा सृजित नहीं किया जा सकता है। किंतु अ अपनी संपत्ति ब को एक अभिव्यक्त या विवक्षित शर्त पर दे सकता है कि ब उस संपत्ति का अ के द्वारा सूचित एक विशेष तरीके से व्ययन करेगा।

(ii) शर्तारोपित व्यक्ति की बाध्यता, प्राप्त संपत्ति के मूल्य से सीमित नहीं होती है। अर्थात् यदि अ एक वसीयत ब के लिए इस शर्त पर करता है कि ब को अ के ऋण चुकाने हैं और ब उस दान को स्वीकार करता है तो वह साम्या में ऋणों को उन्मोचित करने के लिए बाध्य किया जाएगा यद्यपि वह संपत्ति के मूल्य से अधिक है।

  1. किंतु शर्त पर शब्द एक वास्तविक न्यास सृजित कर सकते हैं। इस प्रकार ब को किराए एवं लाभ अदा करने की शर्त पर अ को संपदा का उत्तर दान गठित करता है। क्योंकि यह स्पष्ट है कि कोई लाभकारी हित अ में रहना आशयित नहीं था।

अ अपनी संपत्ति ब को अभिव्यक्त या विवाक्षित शर्त पर देता है कि अपनी संपत्ति स को देगा। यहां स के पक्ष में शर्त है।

क्या यह न्यास है?

न्यास उपनिधान से प्रभेदित

  1. उपनिधान चल संपत्ति की धरोहर है और इस अर्थ में यह न्यास की एक किस्म के रूप में वर्णित की जा सकती है। किंतु उपनिधान एवं न्यास के बीच भारी अंतर है कि सामान्य संपत्ति न्यास की विषय स्थिति में न्यासी पर होती है, जबकि उपनिहती केवल विशेष संपत्ति रखता है, सामान्य संपत्ति उपनिधाता में बंटती है।

  2. इस अंतर का परिणाम है कि न्यासी द्वारा एक अनधिकृत विक्रय सद्भाव क्रेता जो न्यास की सूचना के बिना विधिक हित उपार्जित करता है, सम्यक हक प्रदान करेगा, जबकि उपनिहिती के द्वारा ऐसा विक्रय नियमतः उपनिधान में हक प्रदान नहीं करता।

  3. उपनिहिती उपनिधान के परिणामस्वरूप संपत्ति का स्वामी नहीं हो जाता। किंतु एक न्यासी विधिकतः स्वामी अवश्य हो जाता है। न्यास के परिणामस्वरूप संपत्ति का जिस पर भी वह एक निश्चित विशेष वर्णित ढंग से संपत्ति के साथ व्यवहार करने के एक दायित्व के अधोगत है।