263
न्यास दान से प्रभेदित
साधारण संविदा न्यास से भिन्न होती है। संविदा जो एक तीसरे पक्ष कोऽ
- ऐसा होने पर यदि आदाता को चुनाव की स्थिति में रखने की दाता अभिच्छा न हो तो चुनाव नहीं होता।
I. पालन
समस्याः- अ कोई कार्य करने के लिए ब के साथ प्रसंविदा करता है। अ एक कार्य करता है जो पूर्णतः या अंशतः उसी प्रयोजन को प्रभावी कर सकता है, अर्थात् प्रसंविदा के अंतर्गत उद्भूत होने वाले कर्त्तव्य के पालन के लिए उपलब्ध है किंतु कार्य को प्रसंविदा से संबद्ध नहीं करता है। प्रश्न है इस कृत्य का क्या अर्थ किया जाए? क्या यह अर्थ समझा जाए कि वह एक स्वतंत्र कार्य है। प्रसंविदा कर्त्तव्य पालन करने का था। साम्या का उत्तर है कि प्रसंविदा के अंतर्गत कर्त्तव्य पालन न करना आशक्ति अवश्य माना जाना चाहिए।
सिद्धांतः- पालन की विचारधारा में अंतर्निहित सिद्धांत है कि साम्या उपधारित करती है कि प्रत्येक मनुष्य का अपनी बाध्यता का पालन करने का आशय होता है और जब वह कार्य करता है जो उसी कार्य के अनुरूप है, जिसे करने का उसने वायदा किया था, तब साम्या उस आशय को प्रभावी रूप प्रदान करती है।
यदि इस सिद्धांत को मान्यता प्रदान नहीं की गई तो जो कठिनाइयां उत्पन्न होंगी वे हैं -
दृष्टांतः-
अ ने अपने विवाह पर प्रति वर्ष 200 पाउंड के मूल्य की भूमि क्रय करने और अपनी पत्नी का स्त्रीधन निर्धारित करने के लिए और विवाह की असफलताओं में प्रथम एवं अन्य पुत्रों के लिए निर्धारित करने की प्रसंविदा की।
अ ने उसी मूल्य की भूमि खरीदी किंतु व्यवस्थापन नहीं किया जिससे उसकी मृत्यु पर भूमि उसके ज्येष्ठतम पुत्र को उत्तराधिकार में मिली।
ज्येष्ठ पुत्र, अपने पिता के वैवाहिक अनुच्छेदों पर आधारित 200 पाउंड मूल्य की भमि पिता की व्यक्तिगत संपदा में से प्रति वर्ष खरीद करने की साम्यिक वसीयत कर लाया और वैवाहिक अनुच्छेदों के प्रयोजनार्थ व्यवस्था की। किंतु पालन के सिद्धांत के सिवाए मनुष्य दोनों को प्राप्त करेगा।
II. वाद जिनमें पालन के प्रश्न उद्भूत होते हैं, वर्गों में होते हैंः
(1) जहां भूमियों को खरीदने, व्यवस्थित करने की प्रसंविदा है और वास्तव में क्रय किया जाता है।