भारतीय न्यास अधिनियम - Page 282

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तुष्टि

1. समस्याः- अ ब के प्रति बाध्यता के अधीन है। अ ब को एक दान देता है। प्रश्न हैः क्या ब को प्रदत्त दान एक दान के रूप में ही लिया जाना है। या ब को प्रदत्त दान अ के ब के प्रति बाध्यता की तुष्टि के रूप में लिया जाना है?

II. ये तुष्टि और पालन के बीच समरूपता है। पर दोनों में मूलभूत प्रभेद है।

(1) पालन में कृत कार्य बाध्यता के उन्मोचन के लिए प्राप्त है, किंतु बाध्यताकारी के प्रति विशिष्ट शब्दों में संबंध नहीं है। तुष्टि में यह बाध्यताकारी से संबंधित है किंतु बाध्यता के उन्मोचन से नहीं है।

(2) पालन में, प्रसंविदा का पालन कर दिया गया है, यह निर्भर करता है, आशय पर नहीं वरन् बात पर कि क्या वह कर दिया गया है जिस को किए जाने का करार किया गया था। प्रश्न दान बाध्यता की तुष्टि करता है या नहीं यह दाता के आशय पर निर्भर करता है।

(3) यदि बाध्यता का उसकी शर्तों के अनुसार पालन किया गया है, तो दाता उन्मोचित हो जाता है। यदि बाध्यताधारी अपने दायित्व की तुष्टि में विल के द्वारा दान देता है तो यह उस दान को स्वीकार करे या उसे अस्वीकार करे यह बाध्यताकारी पर निर्भर करता है। यदि वह उसे स्वीकार करता है तो वह अपनी बाध्यता को प्रवृत्त करने के अधिकार से वंचित हो जाता है, यदि वह उसे अस्वीकार करता है तो वह अपने प्रारंभिक अधिकारों को बनाए रखता है।

II. आशय है कि दान पूर्ववर्ती की तुष्टि में है।

III. वाद जिनमें तुष्टि का प्रश्न उद्भूत होता है दो वर्गों में आती हैः-

(1) वाद जिनमें पूर्ववर्ती बाध्यता भेंट के कृत्य से उद्भूत होती है।

(2) वाद, जिनमें पूर्ववर्ती बाध्यता ऋण की प्रकृति की होती है।

IV. वाद जिनमें पूर्ववर्ती बाध्यता बाउंटी के कृत्य से उद्भूत होती हैः-

इस वर्ग में दो प्रकार के वाद आते हैंः-

(अ) प्रभाग के द्वारा वसीयती संपत्ति की तुष्टि।

(ब) वसीयती संपत्ति द्वारा देय भाग की तुष्टि।

(अ) प्रभाग द्वारा वसीयती संपत्ति की तुष्टिः-

प्रभाग एक व्यक्ति की संपदा का वह भाग जो एक बच्चे या दिया य छोड़ा जाता है।

दृष्टांतः-

  1. अ के तीन पुत्र हैं। ब स द। वह एक विल रचता है ओर उस विल में प्रत्येक