पुत्र को एक संपत्ति देता है। विल करने के बाद एक निश्चित रकम का धन उधार दे देता है।
यहां एक वसीयती संपत्ति है और उसके बाद एक प्रभाग। क्या वे समुच्चयी है या अनुकल्पिक है? क्या बच्चा जिसको एक भाग मिला है, उस भाग को पाने के लिए हकदार भी है? या क्या वसीयती संपत्ति का दावा पिता द्वारा प्रदत्त पश्चात्वर्ती प्रभाग से तुष्ट हो जाता है?
साम्या का उत्तर है कि बच्चा वसीयती संपत्ति और एक भाग दोनों को नहीं ले सकता। वसीयती संपत्ति का दावा पश्चात्वर्ती भाग के अनुदान से तुष्ट हुआ ठहराया जाएगा। यह दोहरे भाग का नियम कहलाता है।
II. वसीयती संपत्तियों द्वारा प्रभाग की तुष्टि
(1) यह प्रथम के विपरीत है। वादों के प्रथम वर्ग में प्रथम वसीयती संपत्ति है तब दाय भाग है। दूसरे में दाय भाग प्रथम है तब वसीयती संपत्ति है।
(2) पूर्ववाद में प्रश्न था कि क्या वसीयत द्वारा वसीयती संपत्ति बाद के दाय भाग द्वारा तुष्ट की गई थी। इसमें प्रश्न है, आयादाय भाग देने का दायित्व बाद की वसीयती संपत्ति द्वारा तुष्ट हो जाता है।
(3) उत्तर वही है जैसा कि पूर्ववाद में था। वही नियम दोहरे भाग के विपरीत लागू होता है ताकि एक दाय भाग वसीयती संपत्ति से तुष्ट हो जाएगा।
(4) जब विल व्यवस्थापन से पूर्व होती है तो केवल व्यय स्थापन को इसी प्रकार पढ़ना आवश्यक है। मानो प्रावधान करने वाले व्यक्ति ने कहा था, फ्मेरा अभिप्राय है, जो मैं अपनी विल द्वारा दे चुका हूं यह उसके बाद में होना है।
किंतु यदि व्यवस्थापन विल से पूर्व होता है तो वसीयतकर्ता को इस प्रकार समझा जाए कि वह ऐसे कहता है, फ्जिसे देने के लिए मैं पहले ही आबद्ध हूं उसके बदले यह देता हूं यदि वे जिनसे मैं इस प्रकार आबद्ध हूं इसे स्वीकार करेंगे।य्
- वही नियम, एक दाय भाग द्वारा अनुसारित दाय भाग के मामले में लागू होता है।
II. दोहरे दाय भाग के नियम की परिसीमाएंः
- नियम लागू नहीं होता हैः-
(1) एक वसीयती संपत्ति और एक भाग के वाद में - जहां वसीयती संपत्ति एक विशेष प्रयोजन कै लिए दी जानी अभिव्यक्त और वाद में उधार दिया भाग उसी प्रयोजन के लिए है।
(2) दाय भाग और वसीयती संपत्ति के वाद में और दाय भाग और दाय