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(1) आरक्षणों की शक्तियां।
(2) अस्वीकृति की शक्तियां।
(3) गवर्नर जनरल की नियुक्ति।
(4) उपनिवेशों में उत्तरदायी शासन की प्रकृति।
(5) ब्रिटिश शासन का सम्राट को परामर्श देने का अधिकार।
(6) कालोनियल लॉ वेलिडिटी एक्ट 1865 ।
4. उपनिवेशों में उत्तरदायी शासन की प्रकृति
कार्यपालक शासन गवर्नर में निहित था जो अपनी कार्यकारिणी परिषद् में उन व्यक्तियों को जिन्हें वह उपयुक्त समझता था उनके अतिरिक्त यदि कोई थे जो विधि द्वारा उसके सदस्य थे नियुक्त करने के लिए सशक्त था जबकि एक या दो मामलों में यह अनुबंधित किया गया था कि कार्यकारी परिषद् के मंत्रीगण ही सदस्य होने थे या कि कार्यकारी परिषद् के सदस्यों को विधानमंडल के एक या दूसरे सदन का सदस्य एक दिए गए समय में होना था। किसी भी दशा में, कार्यकारी परिषद् की रचना केवल मंत्रियों के द्वारा होनी विधि द्वारा अपेक्षित नहीं थी।
कार्यकारी परिषद् में मंत्री भी सम्मिलित होते हैं किंतु अनिवार्यतः केवल मंत्रियों से ही नहीं बनती कुछ मामलों में तो कार्यकारी परिषद् के सदस्यों को विधानमंडल के दो में से किसी भी सदन का सदस्य होने की विधिवत आवश्यकता नहीं है।
अधिनियम ने क्रियाकलाप का एक क्षेत्र विहित किया था जिसमें औपनिवेशिक विधायिका उपनिवेश में शांति, व्यवस्था एवं अच्छे शासन के लिए विधि पारित करने की शक्ति थी। इस प्रकार इतनी संविधि।
गवर्नर के लिए अनुदेशों ने उसे एक कार्यकारी परिषद् के साथ शासन करने के लिए अधिकृत सशक्त था जिसकी सलाह को यदि वह ठीक समझता तो अवहेलना कर सकता था।
उत्तरदायी शासन, सम्राट के विश्वास पर न कि सांविधिक आधार पर आधारित था।
अंतर्साम्राज्यिक संबंधों का स्वरूप
राष्ट्रमंडल वाणिज्यिक पोत परिवहन करार में संविदाकारी राज्यों की उस समानता से तुलनीय अधिराज्य पूर्ण समानता की स्थिति में प्रतीत होते हैं और करार से उद्भूत विभिन्नताएं, साम्राज्यिक सम्मेलन 1930 द्वारा अनुध्यात अंतर्साम्राज्यिक विधिकरण को निर्देश हेतु उपयुक्त प्रतीत होते हैं। सी.एम.डी. 3994 भाग - 7 (सात)