2. डोमिनियन प्रस्थिति पर टिप्पणी - Page 295

278 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

किंतु संबंध अंतर्राष्ट्रीय विधि द्वारा शासित नहीं होते हैं। इसका 1924 में स्पष्टतः प्राख्यान किया गया था, जब आयरिश स्वतंत्र राज्य ने 6 दिसंबर, 1921 की संधि के लिए ये करार अनुच्छेद राष्ट्र संघ के सचिवालय में (वाद) इस आधार पर रजिस्टर कराया था कि वह राष्ट्र संघ के प्रसंविदा के अनुच्छेद 18 के अर्थार्न्तगत एक संधि थी और ब्रिटिश शासन का आग्रह था कि राष्ट्र संघ के तत्त्वाधान में संपन्न न तो प्रसंविदा न परम्परा द्वारा राष्ट्रमंडल के भागों में अपनी संबंधों को विनियमित करना आशयित था। (कीथ आर जी - II - 884, 855)

साम्राज्यिक सम्मेलन 1926 ने यही मत अपनाया और यह माना कि आयुद्ध व्यापार सम्मेलन 1925 की विधिक समिति द्वारा यह इस अर्थ में निश्चित किया गया था। आयरिश स्वतंत्र राज्य के साथ ही साथ संयुक्त राज्य इंग्लैंड के अलावा अधिराज्यों ने अंतर्राष्ट्रीय न्याय के स्थाई न्यायालय में जब 1929 में न्यायालय की संविधि के वैकल्पिक खंडों को स्वीकार कराते हुए (सी.एम.डी. 3452 पृष्ठ 415) और उसी प्रकार जब अंतर्राष्ट्रीय विवादों के प्रशांत निपटान के लिए साधारण अधिनियम, 1928 को स्वीकार करते हुए प्रस्ताव किए जाने वाले उन वादों में से अंतर्साम्राज्यिक विवादों को अपवर्जित कर दिया था। सी.एम.डी. 3930, पृष्ठ 14-15

अंतर्साम्राज्यिक अधिमान एक आंतरिक मुद्दा है जिस पर विदेशी राज्यों के साथ अत्यंत प्रिय राष्ट्र संधि खंड लागू नहीं होते।

राजनिष्ठा

सामान्य राजनिष्ठा का बंधन जिसमें ब्रिटिश प्रजा के रूप में एक सामान्य प्रस्थिति अंतर्वर्णित है, ऐसा बंधन है किसी भी भाग की एकपक्षीय कार्रवाई से टूट नहीं सकता, जैसा कि स्टेट्यूट ऑफ वैस्ट मिनिस्टर की उद्देशिका में औपचारिक घोषणा का अभिप्राय है कि चूंकि सम्राट ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के सदस्यों के स्वतंत्र संगम की प्रतीक है और चूंकि वे एक सामान्य निष्ठा से एकीकृत है इसलिए सिंहासन आरोहण या राजसी नाम और उपाधि से संबंधित विधि में कोई परिवर्तन डोमिनियनों (अधिराज्यों) की संसदों एवं यूनाइटेड किंगडम की संसद की अनुमति से ही किया जा सकता है।

जबकि उद्देशिका विधि की रचना नहीं करती यह संविधान की कन्वेशन को व्यक्त करती है जिससे सम्राट या उसके प्रतिनिधि के लिए एक ही भाग द्वारा पारित विधेयक पर अनुमति देना बहुत कठिन हो जाएगा जो समान प्रस्थिति के आधार पर ब्रिटिश राष्ट्रमंडल की एकता के सिद्धांत का उल्लंघन है।

टिप्पणः- 1929 के सम्मेलन की रिपोर्ट का अनुमोदन करते हुए संघ संसद ने लेखबद्ध किया था कि प्रस्तावित उद्देशिका फ्ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के किसी सदस्य के उससे टूटने के अधिकार को निराकृत करने वाली नहीं मानी जाएगी।य्