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साम्राज्य की संसद की पत्रिका
XI. 797 800
किंतु यह दृष्टिकोण साम्राज्यिक सम्मेलन द्वारा औपचारिकतः कभी नहीं अपनाया गया।
अधिराज्यों एवं संयुक्त राज्य इंग्लैंड (यू के) की प्रस्थिति को समता ने साम्राज्यिक विवादों का विनिश्चय करके पद के ढंग पर विचार करना आवश्यक बनाया है। (सी. एम.डी. 3479 पृष्ठ 41)
इस उद्देश्य के लिए साम्राज्यिक सम्मेलन 1930 ने विनिश्चय किया कि ऐसे विवाद तदर्थ मध्यस्थता की कार्य पद्धति से स्वैच्छिक आधार पर निपटाए जाने चाहिए। यह प्रक्रिया सरकारों में मतभेद तक जो न्याय हो सीमित होनी चाहिए।
प्रत्येक विवाद के लिए तदर्थ प्राधिकरण गठित करना होता है, पांच सदस्य होते हैं, कोई भी ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के बाहर से नहीं लिया जाता है।
प्रत्येक पक्ष, राष्ट्रमंडल के सदस्य राज्यों में एक का चयन करेगा, विवाद में पक्षों में से नहीं, होने वाले व्यक्ति जो उच्च न्यायिक पद पर रह चुके हैं या हैं या विशिष्ट न्यायविद और एक चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता के साथ। सभापति (चेयरमैन) इन चार निर्धारकों द्वारा चुना जाएगा जो नियोजित हो सकता है यदि पक्ष व्यय को बराबर-बराबर वहन करने के इच्छुक हों। प्रत्येक पार्टी अपने पक्ष का सुनने का खर्च वहन करेगी।
डोमिनियनों (अधिराज्यों) की बाह्य संप्रभुता उनकी स्वयं सत्ता है। किंतु प्रस्थिति नहीं। उनकी समारोहात्मक प्रस्थिति है किंतु विधिक नहीं। तक्ष्यतः है किंतु विधिकतः नहीं। बहुत से उद्देश्यों के लिए अधिराज्य, संयुक्त राज्य (इंग्लैंड) से स्वतंत्र एक पर्याप्त मात्रा में अंतर्राष्ट्रीय व्यक्तित्व संपन्न है। किंतु सामान्य निष्ठा सामान्य सम्राट, मात्र एक व्यक्तिगत संघ से संबद्ध एक अभिन्न संप्रभु राज्य होने के प्रत्येक अधिराज्य की धारणा में हस्तक्षेप करते हैं।
जैसे कि युद्ध तटस्थता की संभावना संबंधी मुद्दे का विवेचन किया जा चुका है, किंतु केवल दक्षिण अफ्रीका में राष्ट्रवादी शासन द्वारा दावा किया गया है। (कर्थ डी जी. II 867-868, 71, 72 सावरेनिटी ऑफ डोमिनियन्स (अधिराज्यों की संप्रभुता) डी 300, 304, 463 - 471)
यह गंभीर संशय के लिए खुली बात है कि क्या राजा युद्ध में अधिराज्यों को स्वतः लिप्त किए बिना युद्ध की घोषणा कर सकता था।
अधिराज्यीय प्रस्थिति की विशेषताएं
- क्या इससे संप्रभु प्रस्थिति विवस्थित है?