भाग - 2
अधिनियम द्वारा मान्य
विभिन्न प्रकार के विनिर्दिष्ट अनुतोषों का विचार
खंड - 1
संपत्ति के कब्जे का प्रत्युद्धरण
धारा 8, 9, 10 एवं 11
स्थावर संपत्ति के कब्जे का प्रत्युद्धरण - धारा 8, 9
जंगम संपत्ति के कब्जे का प्रत्युद्धरण धारा 10, 11
स्थावर संपत्ति के कब्जे का प्रत्युद्धरण
- प्रश्न है -
कब किसी व्यक्ति को जो एक स्थावर संपत्ति के कब्जे संबंधित हो चुका है और उसके कब्जे को प्रत्युद्धरण के लिए वाद प्रस्तुत करता है कब्जे के संविमुख रहने के लिए नुकसानी या प्रतिकार के बजाए उसका कब्जा दिया जा सकता है।
जोर अनुतोष की प्रकृति पर है - अर्थात् संपत्ति को वह खास खंड वापस पाना जिसको कब्जा दिया गया है। नुकसानी प्रतिकार के द्वारा अनुतोष सामान्य विधि के अंतर्गत हमेशा स्पष्ट है। प्रश्न है कब एक व्यक्ति, संपत्ति की वापसी के लिए विनिर्दिष्ट अनुतोष के लिए आग्रह कर सकता है।
वाद जिनमें एक व्यक्ति स्थावर संपत्ति का कब्जा खो चुका है, दो वर्गों में आते हैंः-
(i) ऐसे व्यक्ति का वाद जो कब्जे के लिए हकदार है किंतु जो कब्जा
खो चुका है।
(ii) ऐसे व्यक्ति का वाद जिसका कब्जा था किंतु कब्जा खो चुका है।
कब्जे के लिए हकदार होने में और कब्जे में होने में अंतर होता है।
धारा 8 एवं 9 में ये दो स्थितियां हैं। दोनों में उपबंध हैं कि प्रत्येक वाद में वादी संपत्ति के प्रत्युद्धरण के माध्यम से विनिर्दिष्ट अनुतोष के लिए हकदार होगा।
धारा 8 की अपेक्षाएं -