288 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
(i) सिद्ध करो कि तुम कब्जे के लिए हकदार हो और आप विनिर्दिष्ट अनुतोष के माध्यम से कब्जे के प्रत्युद्धरण में सफल होंगे।
- धारा 9 की अपेक्षाएं -
(i) सिद्ध करो कि आप वाद के दिनांक से पूर्व 6 मास के अंतर्गत कब्जा रखते थे।
(ii) सिद्ध करो कि आप विधि में देय लेख अंतराल से अपनी सम्मति बिना य अन्यथा कब्जा वंचित किए गए थे।
अ का कब्जा है उसे ब द्वारा बेकब्जा किया जाता है।
I. अ हकमुक्त है, ब द्वारा बेकब्जा किया जाता है हकरहित है।
II. हकरहित है, ब द्वारा कब्जा किया जाता है हकयुक्त है।
III. हकरहित है, ब द्वारा कब्जा किया जाता है हकरहित है।
(1) सभी तीनों दशाओं में अ कब्जे का प्रत्युद्धरण कर सकता है। यदि वह धारा 9 के अंतर्गत अर्थात् छः माह के हक के प्रश्न के होते हुए भी वाद लाता है।
(2) यदि वह छः माह के बाद वाद लाता है तो वह हक पर अवश्य भरोसा करे ताकि अ कब्जे का प्रत्युद्धरण कर सके।
(I) क्योंकि उसका हक है।
(III) क्योंकि उसका सकब्जा हक है
किंतु वह II में प्रत्यादान प्रत्युद्धरण नहीं कर सकता क्योंकि ब का हक है अ का नहीं।
धारा 10 के अधीन कौन वाद चला सकता है।
धारा 10 के अनुसार केवल संपत्ति के कब्जे के लिए हकदार व्यक्ति वाद ला सकता है।
‘कब्जे का हकदार’ का अभिप्राय।
कब्जे का हक उद्भूत हो सकता है।
(i) स्वामित्व के परिणामस्वरूप या
(ii) स्वामित्व से स्वतंत्र वर्तमान कब्जे के स्थाई या विशेष अधिकार के रूप में।
- स्वामित्व के परिणामस्वरूप कब्जे का हक।
(i) स्वामित्व मात्र विधिक स्वामित्व हो सकता है या वह लाभकारी हित विधिक स्वामित्व हो सकता है।