प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट के समक्ष - Page 31

14 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

(फ) अभियुक्त के तर्क एवं परीक्षण (यदि कोई हो)

(ग) अंतिम आदेश

(ह) ऐसे आदेश का दिनांक

(ई) सभी वादों में जहां दंडादेश, कारावास या 200 से अनधिक अर्थ दंड या दोनों

का है, दोष सिद्धि के कारणों का विवरण।

धारा 371

निर्णय की प्रति अभियुक्त को अविलम्ब दी जाए।

सम्मन मामलों से भिन्न अन्य मामलों में वह निःशुल्क दी जाएगी। जूरी द्वारा विचारण में आरोप के शीर्ष की एक प्रति उसे जूरी द्वारा दी जाएगी। मृत्यु के दंडादेश में, अभियुक्त को अपील की अवधि के समय को सूचित करेगा।

धारा 373

सेशन न्यायालय का जिला मजिस्ट्रेट को निष्कर्ष एवं दंडादेश की प्रतिलिपि भेजा जाना।

अपराधी के विचारण से भिन्न कार्यवाइयां

(i) शांति बनाए रखने एवं सुव्यवस्था बनाए रखने से संबंधित।

(ii) कुछ बाध्यताओं के प्रवर्तन से संबंधित पारिवारिक बाध्यता एवं लोक त्रुटि।

(iii) लोक शक्ति बनाए रखने से संबंधित।

(iv) लोक जमाव से संबंधित शक्ति बनाए रखना एवं व्यवस्था कायम रखना।

अपराध किए जाने पर दंड देने से बेहतर है अपराध को रोकना। यह सिद्धांत सार्वभौमिक रूप से स्वीकार नहीं किया जाता है। अपराध को रोकने का प्रयास व्यक्ति की स्वतंत्रता में अनुचित हस्तक्षेप को अंतर्ग्रस्त कर सकता है।

इंग्लिश विचारधारा इस दृष्टिकोण की ओर है कि राज्य को तभी हस्तक्षेप करना चाहिए जब व्यक्ति का आचरण अपराध के समान हो। अर्थात् - राजद्रोह, जमाव की आंग्ल विधि।

दूसरी ओर भारतीय विधि एक भिन्न दृष्टिकोण अपनाती है। अर्थात् प्रेस अधिनियम, लोक अधिसेशन अधिनियम।

ऐसा होने से दंड प्रक्रिया संहिता में अपराधों को रोकने के लिए दंड न्यायालयों को सक्षम बनाने के लिए कुछ धाराओं का अधिनियम न किया गया है।

(पृष्ठ खाली छूटा - संपादक)

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