294 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
(iii) पूर्ववर्ती कब्जा कितना भी अल्प हो, दोषकर्ता के विरुद्ध स्वतः एक हक है और पूर्ववर्ती कब्जा एवं कब्जाहीनता का अभिनाक मात्र है वस्तुतः कब्जे के प्रत्युद्धरण के लिए एक अच्छा आधार है।
(1) जहां कब्जाहर्ता कोई हक साबित नहीं कर सकता या
(2) जहां दोनों में कोई साक्षी पक्ष हक को साबित नहीं कर सकता। स्थिति का विवरण
स्थिति का विवरण
अ द्वारा ब कब्जे में ↓ निपटान ↓
↓ ↓ ↓ ↓
(अ) (ब) (अ) (ब) हक सहित हक रहित हक रहित हक सहित I. छः मास के भीतर लाया गया वाद
(अ) और (अ) अ धारा 9 के अधीन
(ब) और (ब) हक से निरपेक्ष होकर भी
(ब) और (अ) कब्जा पा सकता है।
II. छः माह के बाद लाए गए वाद मेंः-
(अ) और (अ) अ कब्जा पा सकता है क्योंकि हक अ को है।
(ब) और (ब) अ कब्जा नहीं पा सकता क्योंकि हक ब को है।
(ब) और (अ) पूर्ववर्ती कब्जे के कारण अ कब्जा पा सकता है।
- कब्जे के लिए हकदार
कब्जे के लिए अधिकार अस्तित्व में होता है या तो -
(i) स्वामित्व के भाग रूप या
(ii) स्वामित्व से स्वतंत्र, अस्थाई या विशेष अधिकार के तौर पर ये विशेष अधिकार या तो -
(1) स्वामी के कृत्य से या
(2) स्वामी के कृत्य से अन्यथा उत्पन्न होते हैं।
स्वामी के कृत्य से
(1) उपनिधान (2) धारणाधिकार।
उपनिधान धरोहर और भाड़े का साधारण और (2) विशेष होता है। (i) साधारण उपनिधान जेसे ऋण, अभिरक्षा, वाहन एवं अभिकरण।
साधारण उपनिधान में उपनिधानता को कब्जे का अधिकार होता है और अपने हितों का विधिक कब्जा होता है।