अधिनियम द्वारा मान्य - Page 312

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(अ) उपनिधाता और (ब) उपनिहिती है। दोनों स के विरुद्ध कब्जे का प्रत्युद्धरण कर सकते हैं।

(ii) विशेष उपनिधान (अर्थात् धारणाधिकार - अनु) - धरोहर एवं भाड़ा।

उपनिधाता को उपनिधान के प्रवर्तन कार्यकाल के कब्जे का अधिकार नहीं होता है और वह केवल कब्जे का प्रत्युद्धरण कर सकता है। धारणाधिकार ऋण से उद्भूत होता है - विक्रेता का विक्रीत वस्तु के कब्जे का अधिकार बनाए रखता है जब तक कि क्रेता क्रय धन आदान कर चुके।

2. द्वितीय स्वामी के कृत्य से अन्यथा कब्जे का अधिकार।

खोए सामान को पाने वाला - स्वामी के अतिरिक्त समग्र जगत के विरुद्ध कब्जे का हक।

भाग II

संविदा का पालन

संविदा का विशिष्ट पालन, उसका अनुबंधों एवं निबंधनों के अनुसार वास्तविक निष्पादन है, और संविदा के अनिष्पादन के लिए नुकसानी या प्रतिकार से विषम है।

यह विनिर्दिष्ट अनुतोष की एक किस्म है जो पक्ष को वही कार्य करने का आदेश देने से मिलता है जिसे ठेकेदार के नाते करने के लिए वह बाध्य है।

संविदा का विशिष्ट पालन

धारा 12 एवं 21 संविदा के विशिष्ट पालन के बारे में है।

धारा 21 - परिभाषित करती है उन संविदाओं को जो विशिष्टतः लागू नहीं हो सकती हैं।

धारा 12 - परिभाषित करती है उन संविदाओं को जो विशिष्टतः लागू की जा सकती हैं।

धारा 21 - आठ प्रकार की संविदाएं हैं जो विशिष्टतः लागू नहीं हो सकतीं।

(1) संविदाएं जिनके पालन न करने पर धनीय प्रतिकार पर्याप्त अनुतोष है।

(2) संविदाएं (i) जो सूक्ष्म विवरणों में होती है, (ii) पक्षों की निजी योग्यता या इच्छा पर आश्रित होती हैं।

(iii) ऐसी हैं कि न्यायालय उसकी तात्विक शर्तों का विनिर्दिष्ट पालन लागू नहीं करा सकता।

(3) संविदाएं जिनकी शर्तों को न्यायालय युक्तिमुक्त निशि्ंचतता से नहीं पा सकता जैसे आवश्यक उपयंत्र।