अधिनियम द्वारा मान्य - Page 317

300 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

(2) जहां भाग विभाजनीय भागों में होते हुए भी जो प्रतिकार स्वीकृति से पालन नहीं हो सकते और समग्र में एक छोटा अनुपात वहन करता है, वहां वह पक्ष विनिर्दिष्ट पालन के लिए वाद ला सकता है। धारा 14

(3) जहां भाग अविभाजनीय हो, वहां भाग जो प्रतिकार की स्वीकृति से पूरा नहीं हो सकता और समग्र उपक्रम वचन के बड़े अनुपात को वहन करता है वायदी शेष के विनिर्दिष्ट पालन के लिए वाद ला सकता है बशर्ते कि वह पालन कराने के सभी दावों और नुकसानी के सभी अधिकारों को त्याग देता है जो पालन योग्य है - धारा 15

(4) जहां भाग अविभाजनीय हो वहां वह भाग जिसका पालन नहीं किया जा सकता प्रतिकार की स्वीकृति नहीं करता और बड़ा भाग विनिर्दिष्ट पालन वहन करता है उस भाग की जो पालन योग्य है धारा 15 में वर्णित शर्तों के अंतर्गत डिक्री हो सकती है।

संविदा का विनिर्दिष्ट पालन

जहां विक्रेता या पट्टठ्ठाकर्ता के पास अपूर्ण हक है।

(1) इसके लिए नियम धारा 18 में रखा गया है। यह धारा चार खंडों में हैः-

(i) जहां एक क्रेता/पट्टठ्ठेदार ने संविदा के बाद अच्छा हक पा लिया है।

(ii) जहां अन्य व्यक्ति की स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक है।

(iii) जहां एक अभिभारित संपत्ति बेची जाती है मानों वह अनअधिभारित थी।

(iv) जहां निक्षेप अदा कर दी गई है और विनिर्दिष्ट पालन का वाद खारिज कर दिया गया।

खंड - (क) अखंडनीय सिद्धांत पर आधारित है कि जब कोई व्यक्ति संविदा संविदा पालन की शक्ति के बिना करता है और बाद में वह उस संविदा का पालन करने की शक्ति प्राप्त कर लेता है तब वह ऐसा करने को बाध्य है।

दृष्टांतः- एक उत्तराधिकारी प्रत्यक्षतः जो अपने अधीन संपत्ति को संविदा करता है, यदि एवं जब वह संपत्ति को प्राप्त करता है, ऐसी संविदा का विनिर्दिष्ट रूप से पालन करने को बाध्य किया जाएगा।

जब कभी विक्रेता संविदा के बाद संपत्ति में हित प्राप्त करता है, वह क्रेता को अंतरित करने को बाध्य होगा।

खंड (ख) इस सिद्धांत पर आधारित है कि जहां संविदा की वैधता संविदा के अजनबी व्यक्ति की सहमति पर निर्भर करती है और संविदा के लिए अजनबी विक्रेता या पट्टठ्ठेदार की मांग पर अंतरण करने को आबद्ध है और क्रेता और पट्टठ्ठेदार इस प्रकार की सहमति पाने के लिए उसे बाध्य कर सकते हैं।