अधिनियम द्वारा मान्य - Page 318

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खंड (ग) इस सिद्धांत पर आधारित है कि जहां संपत्ति बेची या पट्टठ्ठे पर दी गई है वहां वह अधिभार मुक्त होने के रूप में प्रस्तुत की गई है। किंतु अधिभारित है, विक्रेता उसको संपत्ति के अधिभार विक्रय जो बंधित है से मुक्त करने के लिए बाध्य किया जाएगा बशर्ते कि मूल्य बंधक धन से अधिक न हो।

खंड (घ) ख्ांड ख एवं ग में वे मामले आते हैं जहां क्रेता या पट्टठ्ठेदार के पूर्णत्व के लिए वाद लाने वाला वादी है। खंड (घ) में ऐसा मामला आता है जहां विक्रेता या पट्टठ्ठेदार द्वारा विनिर्दिष्ट पालन के लिए वाद लाया जाता है और उसके हक को पूर्ण करने के लिए समर्थ न होने के कारण वह (वाद) असफल हो जाता है।

इस प्रकार के वाद में न्यायालय वादी को न केवल व्यय के साथ निरस्त करता है, वरन प्रतिवादी क्रेता को एक विशेष अनुतोष दिलवाने की कार्यवाही करता है। यथा उसके निक्षेप ब्याज सहित और उसके हर्जाने की वापसी और बेची जाने या किराए पर दी जाने वाली संपत्ति पर इन सबके लिए एक धारणाधिकार।

जमा के संबंध में सामान्य नियम - निक्षेप संविदा के पालन की प्रत्याभूति (गारंटी) के रूप में अदा की जाती है और जहां संविदा क्रेता की अवहेलना के कारण असफल हो जाती है वहां विक्रेता निक्षेप का प्रतिधारण करने के लिए हकदार है।

विनिर्दिष्ट पालन के लिए वाद लाने के संविदा के पक्षों के अधिकार

चार स्थितियों पर विचार करना होगा -

(1) किसके लिए संविदा विशिष्टतः लागू की जा सकती है।

(2) किसके लिए संविदा विशिष्टतः लागू नहीं की जा सकती है।

(3) किसके विरुद्ध संविदा विशिष्टतः लागू की जा सकती है।

(4) किसके विरुद्ध संविदा विशिष्टतः लागू नहीं की जा सकती है।

I. किसके लिए संविदाओं को विशिष्टतः लागू किया जा सकता है।

धारा 23 इस प्रश्न के बारे में कि कौन विनिर्दिष्ट पालन उपलब्ध कर सकता है?

(खंड क) - उसका हर एक पक्ष।

(खंड ख)

(1) वचनग्रहीता का समनुदेशिती प्रतिनिधि।

(2) वचनग्रहीता की मृत्योपरांत उसका विधिक प्रतिनिधि।

(3) एक वचनग्रहीता का गुप्त सिद्धांत।

इनमें से हर एक संविदा जिसमें वह हितबद्ध है, का विनिर्दिष्ट पालन उपलब्ध कर सकता है, किंतु हर एक इस परंतुक के अधीन है कि संविदा निश्चित व्यक्तिगत नहीं