अधिनियम द्वारा मान्य - Page 319

302 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

होनी चाहिए, न संविदा वचनग्रहीता के हित के समनुदेशक को निषिद्ध करे।

(ग) एक वैवाहिक संविदा के लाभों के लिए या उसी परिवार के सदस्यों के बीच संदिग्ध अ धकारों के समझौते के लिए हकदार व्यक्तिगण।

(घ) आजीवन किराएदार के द्वारा की गई संविदा पर शेष व्यक्ति।

(घ) सकब्जा उत्तरभोगी।

(च) शेष में उत्तरभोगी।

(छ) आमेलन पर नई कंपनी।

(ज) संप्रवर्तकों द्वारा कृत संविदा पर कंपनी।

IV. वे स्थितियां जिनमें संविदा उसमें परिवर्तन के सिवाए विशिष्टतः प्रवर्तित नहीं कराई जा सकती - धारा 76

(1) मूल या कपट से संविदा शर्तों में हैं जो उनसे भिन्न है जिनकी उसमें होने की प्रतिवादी ने अपेक्षा की थी।

(2) प्रतिवादी ने संविदा प्रतिवादी एवं वादी के बीच उसके प्रभाव के संबंध में यथोचित प्रतिबोध में की।

(3) वादी के किसी दुर्व्यपदेशन पर भरोसा करके संविदा।

(4) जहां उद्देश्य यह है कि वस्तु कोई परिणाम देने वाली है जिसे देने में संविदा असफल रहती है।

(5) जहां पक्षगण उसे परिवर्तित करने को सहमत हो गए हों।

टिप्पणी

धारा 91, 92 साक्ष्य अधिनियम - वादी परिवर्तन करने के संबंध में मौखिक साक्ष्य नहीं दे सकता। वह प्रतिवादी को यह दर्शाने को विवर्जित नहीं करता है कि कपट या दुर्व्यपदेशन के कारण विलेख में समग्र संविदा अंकित नहीं है। वह धारा 92 के परंतुक के अधीन प्रमाणित करने के लिए कि मौखिक साक्ष्य दे सकता है उसमें परिवर्तन है।

वादी उस वाद में डिक्री नहीं प्राप्त कर सकता है जब तक वह परिवर्तन के लिए प्रस्तुत नहीं होता है, वादी को चुनाव करना है या तो (1) अपनी विनिर्दिष्ट पालन की कार्यवाही को निरस्त करा ले या (2) उसे परिवर्तन के अधीन कर दें। यदि वह परिवर्तन को स्वीकार करता है तो वह प्रतिकार का उपचार नहीं गंवाता है।

(2) (ii) व्यक्ति जिनके लिए संविदा विनिर्दिष्टतः प्रवर्तित नहीं हो सकती। धारा 24 एवं 25 में।

धारा 24