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साम्यिक बंधक विलेख से अन्यथा भी किया जा सकता है -
(क) व्यापार संविधि की अपेक्षा थी कि किसी भूमि या उसमें किसी हित की
किसी संविदा या विक्रय के संबंध में कोई (न्यायिक) कार्यवाही नहीं ही की
जाएगी जब तक कि करार लिखित नहीं और पक्षकार या उसके अभिकर्ता
द्वारा हस्ताक्षरित नहीं।
किंतु यदि किसी संपदा के हक में विलेख, मौखिक संप्रेषण के बिना ही देनदार द्वारा लेनदार के पास जमा कर दिए गए हैं तो ऐसे जमा किए जाने का तथ्य मात्र लेनदार के पास संपदा को बंधक किए जाने के लिए पर्याप्त है।
(ख) ऐसा करार कि लेनदार ऋण के भुगतान के लिए भूमि को उचित किराए पर
धारण करेगा, साम्या के अंतर्गत बंधक हैं, किंतु विधि के अंतर्गत नहीं।
(ii) समनुदेशनः- विधिक एवं साम्यिक विधिक
विधिकः-
समनुदेशन निश्चित समुदेश द्वारा लिखित हस्ताक्षरित होना चाहिए - अभिकर्ता के हस्ताक्षर पर्याप्त नहीं हैं।
विलेख में लेनदार का देनदार के लिए निर्देश या आदेश, समनुदेशिती अदा करने को निश्चित अंकित होना चाहिए।
देनदार को समनुदेशन की सुस्पष्ट सूचना (नोटिस) अवश्य होनी चाहिए।
साम्यिकः-
- समनुदेशन या ढंग या प्रारूप महत्त्वहीन है परंतु पक्षों का आशय स्पष्ट हो, समनुदेशन मौखिक भी हो सकता है।
(iii) भार - विधिक एवं साम्यिक।
(iv) पट्टठ्ठा - विधिक एवं साम्यिक।
(v) भोगाधिकार (सुविधा-अधिकार) - विधिक एवं साम्यिक।
विवाहित महिला की संपत्ति
यह निदर्शित करता है कि एक विधिक अधिकार के सृजन के लिए अपेक्षित हस्तांतरण की विधिक औपचारिकताओं के बिना एक साम्यिक अधिकार किस प्रकार उद्भूत हो सकता है।
- सामान्य विधि के अनुसार पति एवं पत्नी एक व्यक्ति थे, और पत्नी की प्रस्थिति पति की प्रस्थिति में विलय हो जाती थी। इस विलय का परिणाम था कि पति उसकी व्यक्तिगत संपत्ति का पूर्ण स्वामी हो जाता था और उसकी निजी संपदा को नियंत्रित