लोक प्रशांति के विरुद्ध अपराधों से संबंधित है। - Page 33

16 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

धारा 183

(9) जब अपराधी यात्रा या समुद्र यात्रा पर है और वहां अपराध किया जाता है तो वहां

उस अपराध की जांच और विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा जिसकी

अधिकारिता में कहीं भी या किसी भी स्थानीय सीमाओं के अंतर्गत -

अपराधी या वह व्यक्ति जिसके विरुद्ध उस यात्रा या समुद्र यात्रा में या वस्तु जिसके संबंध में अपराध किया गया था।

धारा 184

(10) रेलों, तारघरों, डाकखानों, अस्त्र एवं शस्त्रों से संबंधित तत्समय प्रवर्तित किसी

विधि के प्रावधानों के विरुद्ध सभी अपराधों की जांच और विचारण प्रेसीडेंसी नगर

में किया जा सकता है।

धारा 185

(11) संदिग्ध मामलों में, उच्च न्यायालय को विनिश्चित करना है कि किस अधीनस्थ

न्यायालय की अधिकारिता होगी।

जहां दो या अधिक अधीनस्थ न्यायालय एक ही उच्च न्यायालय के अधीनस्थ न हों वहां उच्च न्यायालय जिसकी दांडिक अपीली अधिकारिता के अंतर्गत कार्यवाही पहले आरंभ हुई विनिश्चय कर सकता है एवं निदेश दे सकता है।

धारा 186

(12) जब प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट, जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या स्थानीय सरकार

द्वारा विशेष रूप से सशक्त प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट यह विश्वास करने के कारण

देखता है कि अधिकारिता की ऐसी स्थानीय सीमाओं के बाहर किसी व्यक्ति ने

अपराध किया है (ब्रिटिश भारत के अंदर या बाहर।) तो जिन अपराधों की जांच

और विचारण ऐसी स्थानीय सीमाओं के अंतर्गत नहीं किया जा सकता, किन्तु

तत्समय प्रवर्तित किसी विधि के द्वारा ब्रिटिश भारत में किया जाए।

ऐसा मजिस्ट्रेट उस अपराध में जांच कर सकता है और उस व्यक्ति को उपस्थित होने के लिए बाध्य कर सकता है और उसको अधिकारिता रखने वाले मजिस्ट्रेट के पास भेज सकता है।

ब्रिटिश भारत के बाहर किए गए अपराध

अब तक हम ब्रिटिश भारत की सीमाओं के अंतर्गत किए गए अपराधों के संबंध में विचार कर चुके हैं। अब मान लो कि यद्यपि अपराधी ब्रिटिश भारत के भीतर है किंतु अपराध ब्रिटिश भारत के बाहर किया जाता है तो ऐसी परिस्थिति में क्या किया जाए?

यह दो प्रकार निपटाया जा सकता है -