सामान्य विधि - Page 331

314 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

छह कारणों से लोग उपयोगार्थ भूमि रखने के प्रचलन को पसंद करते थे। उनमें से दो महत्त्वपूर्ण हैंः-

(1) इसने एक पक्ष को उस जागीरदारी के अधिभारों से जिनके लिए वह सामान्य विधि में दायित्वाधीन था, बच निकलने में समर्थ बना दिया। सामान्य विधि में काश्तकार पर निम्नलिखित अधिभार डाल दिए गए थेः

(i) अनुतोष - पुराने काश्तकार की मृत्यु पर नए काश्तकार को देना पड़ता था।

(ii) सहायताएं - तीन मामलों में देयः-

(अ) स्वामी जब जेल में हो तो मुक्ति धन देना।

(ब) जब स्वामी अपने लॉर्ड को सरदार (नाइट) बना देना चाहे।

(स) जब स्वामी अपनी ज्येष्ठतम पुत्री को दहेज देने को बाध्य हो।

(iii) राजागामी संपत्ति - काश्तकार द्वारा महापराध के समान पर्याप्त गंभीर अपराध का कृतिकरण भूमि का राजागामी बनाने का कारण बन जाता था।

(iv) प्रतिपाल्यत्व - यदि कोई विद्यमान काश्तकार 21 वर्ष से कम का पुरुष या 14 वर्ष से कम की स्त्री को वारिस के रूप में छोड़कर मर जाता था तो स्वामी उस वारिस की प्रतिपाल्यता के हकदार था और परिणामस्वरूप अव्यस्कता के काल में भूमियों का बिना कोई हिसाब देने के दायित्व का मनचाहा उपयोग करने को स्वतंत्र था।

(v) विवाह - एक शिशु प्रतिपाल्य के लिए उपयुक्त वर खोजना स्वामी का अधिकार था और यदि शिशु प्रतिपाल्य के मना करने पर स्वामी प्रतिकार का अधिकारी था।

जागीरदार अपनी भूमि उपयोग में रखकर स्वतंत्र हो जाता था। भार उस व्यक्ति पर होता था जिसने सीसिन अर्थात् उपयोगार्थ जागीर को अर्जित किया था।

(2) दूसरा लाभ समपहरण एवं राजगामित्व से बचना।

सामान्य विधि में सावधि धारित भूमि सम्राट को समपहृत हो जाती थी, यदि काश्तकार ने विकट राजद्रोह किया हो और उसके सिद्ध दोष होने या महापराध के लिए दासत्व में जाने पर उसका स्वामी के हित में राजगमन हो जाता था। ये दुःखद परिणाम बचा लिए जाते थे, यदि एक काश्तकार किसी संदिग्ध उद्यम से पूर्व, अपनी भूसंपत्तियों को अपने कुछेक विश्वसनीय मित्रों में निवेशित करने की दूर दृष्टि रखता था। अपचारी संभवतः चरम दंड पा सकता था किंतु कम से कम उसका परिवार निराश्रित नहीं हो पाता था।

4. भूसंपत्तियों को उपयोग में रखने के विधिक परिणामः-

(i) इस भूसंपत्तियों को उपयोग में रखने की परिपाटी के विधिक परिणाम