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- सब मिलाकर हमें तीन प्रश्नों पर विचार करना होगा। जो इस प्रकार हो सकते हैंः-
(i) क्या एक व्यक्ति जो एक विधिक अधिकार अर्जित करता है, पूर्ववर्ती साम्यिक अधिकार के अधीन होगा?
(ii) क्या किसी भी पक्ष का विधिक अधिकार नहीं है, दोनों के केवल साम्यिक अधकिर है, उनमें से किसकी प्राथमिकता होगी?
(iii) क्या एक व्यक्ति जिसने एक विधिक अधिकार अर्जित कर लिया है, वह पूर्ववर्ती साम्यिक अधिकार के अधीन होगा?
(1) इस प्रश्न का उत्तर हैः-
मूल्य देकर और पूर्ववर्ती साम्यिक अधकिर की सूचना के बिना एक विधिक संपदा का क्रेता साम्यिक अधकिर से आबद्ध होगा।
(2) इस प्रतिपादन में तीन महत्त्वपूर्ण अवयव हैंः-
(1) के्रता ने विधिक संपदा अवश्य अर्जित कर ली हो -
इस विषय में अधिक कहने को कुछ नहीं है। किंतु निम्नलिखित मुद्दों को ध्यान में रखा जा सकता हैः-
(अ) यह आवश्यक नहीं है कि उसने विधिक संपदा व्यक्तिगत रूप से अर्जित की हो। यह पर्याप्त है कि कोई व्यक्ति उसके निमित्त इसे करता है।
थार्नडिके बनाम हंट, (1859) 3 डी ई जी आई 563-44 ई आर 1386
(ब) क्रेता का हक पूर्ण हक होना आवश्यक नहीं है।
दृष्टांतः- यदि संपत्ति पर न्यासी का हक त्रुटिपूर्ण है तो भी वह एक पूर्ववर्ती साम्यिक अधिकार के स्वामी के विरुद्ध प्रभावी होगा।
जेम्स बनाम पाओलेस (1834) 3 एम.वाई. एंड के. 581
तथ्यः 1. जेम्स जोन्स, स्वामी ने होलकुक के पास अपना घर बंधक रखा, बंधक का मोचन किया, अदायगी की अभिस्वीकृति प्राप्त कर ली - प्रतिहस्तांतरण पत्र प्राप्त नहीं किया। विधिक संपदा होलकुक के पास अदत्त रही।
जोन्स की मृत्यु पर उसके दुकान के सहायक मैरेडिथ ने जोन्स की जाली विल बनाई और उसके निर्विष्टों के आधार पर मकान का कब्जा ले लिया।
मैरेडिथ ने हस्तांतरण द्वारा उसे हॉल के पास बंधक रख दिया।
मैरेडिथ का देहांत हो गया। उसकी पत्नी जीवित थी, जिसके लिए एक विल द्वारा उसने मोचन का साम्यिक अधिकार भी छोड़ा था, जो उसके बाद जेम्स जोन्स के