सामान्य विधि - Page 340

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  1. इलामेस ने कहा कि उसने हक विलेखों के बाद कोई जांच नहीं की, इससे पूर्व उसने प्रतिभूति ले ली, और स्वीकार किया कि बंधक विलेख लिखने पर उसने जांच की उनके लिए बगैर उनके डॉ. पी के हाथों में होने के संबंध में, सूचित किया, किंतु उसने उसको मात्र सुरक्षित अभिरक्षा में समझा था।

  2. उसने यह सूचना एक व्यक्ति जे से पाई, जो उसका विधि बंधु (साला या बहनोई था) जिसने बंधक तैयार किया था और उसके संपादन के समय उसका अभिकर्ता था।

  3. डॉ.पी. ने इलामेस पर प्राथमिकता का दावा किया। यह मंजूर किया गया था चूंकि इलामेस को सूचना प्राप्त ठहराया गया था।

(iii) जहां सामान्य एवं उचित जांच न किए जाने में भारी उपेक्षा होती है।

1899, 2 सी.एच. - 264,1921, 1 सी.एच. - 98,

आरोपित सूचना

  1. अभिकरण (एजेंसी) का अंतर्निहित सिद्धांत है कि एक व्यक्ति अभिकर्ता (एजेंट) द्वारा कोई कार्य कर सकता है, जिसे वह स्वयं कर सकता है, विपरीतितः जो कुछ अभिकर्ता द्वारा किया जाता है, उसी के द्वारा किया जाता है। ऐसा होने पर यह तर्क दिया जा सकता है कि जो अभिकर्ता को ज्ञात है, उसे स्वामी द्वारा ज्ञात अवश्य माना जाए। इसी सिद्धांत पर आरोपित सूचना आधारित है।

आरोपित सूचना के अनिवार्य तत्त्व

  1. उसको जानकारी अभिकर्ता के स्वरूप हुई हो, न कि किसी अन्य हैसियत में। दूसरे शब्दों में अभिकरण पूरी तरह सिद्ध करना चाहिए।

डाइली बनाम पोलेने 32 एल.जे.सी.एच. 782 (एन.एस.)

  1. अभिकर्ता लिपिकीय काम करने के लिए नियोजित व्यक्ति से निश्चित सुभिन्न होना चाहिए। उदाहरणार्थ विलेख निष्पादित करने के लिए नियोजित व्यक्ति अभिकर्ता है। ऐसे व्यक्ति का ज्ञान आरोपित सूचना का आधार नहीं हो सकता है।

  2. इस संबंध में एक व्यक्ति की स्थिति, जो दो स्वामियों की सेवा में अभिकर्ता है, विचारित की जानी है। मान लीजिए अ और ब दो कंपनियां है और स दोनों कंपनियों में नियुक्त एक अधिकारी है। मान लो कि अ कंपनी ने अपना विधिक अधिकार ब कंपनी को हस्तांतरित किया, जो द के पक्ष में एक साम्यिक अधिकार के अधीन था, जिसकी स को जानकारी थी।

क्या द कह सकता है कि ब कंपनी को उसके साम्यिक अधिकार की सूचना थी, क्योंकि स जो उनका अभिकर्ता है को अ के अभिकर्ता की हैसियत से इसकी सूचना थी।