सामान्य विधि - Page 343

326 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

(1428) ए.सी.आई. - हाफटन एंड कं. बनाम नादार्ड।

(II) जहां साम्यिक अधिकार विधिक अधिकार के अस्तित्व में आने के बाद उत्पन्न हुआ हो -

इस प्रश्न पर निर्देशक मामला निम्न है -

नार्दर्न कंट्रीज ऑफ इंग्लैंड फायर इंश्योरेंस कं. बनाम व्हिप

1884, 26 सी.एच.डी. 482

तथ्यः

(स) एक कंपनी के मैनेजर ने अपनी कंपनी को एक बंधक किया हक पत्र दे दिए, वे कंपनी की तिजोरी में रख दिए गए। उसकी चाबी स के कब्जे में थी। कुछ समय बाद स ने हक पत्र निकाल लिए और उसी संपत्ति का एक दूसरा बंधक श्रीमती व्हिप के पक्ष में कर दिया। श्रीमती व्हिप को कंपनी के पक्ष में प्रथम बंधक की कोई सूचना नहीं थी। अभिनिर्धारित किया गयाः कंपनी प्राथमिकता की हकदार थी।

  1. वाद में अभिकथित प्रतिपादन यह हैः-

जहां किसी विधिक संपदा के स्वामी ने कपट में सहायता की या मौन सहमति दी है, जिसने एक पश्चात्वर्ती सिम्यक संपदा का सृजन किया और साम्यिक संपदा के स्वामी को पूर्ववर्ती विधिक अधिकार को कोई सूचना नहीं थी, न्यायालय विधिक संपदा को साम्यिक संपदा के लिए स्थगित करेगा, यद्यपि वह बाद में उत्पन्न हुआ है।

  1. कपट में सहायता या उस पर मौन सहमति का साक्ष्य क्या हैः-

(i) हक विलेखों के बाद जांच में साधारण सावधानी न बरतना।

(ii) हक विलेख पत्र को लेने की असफलता, कपट की सहायता या मौन सहमति के साक्ष्य हैं जहां इस प्रकार के आचरण को अन्यथा स्पष्ट नहीं किया जा सकता।

  1. एक अन्य वाद में भी यही नजीर है जिसमें भी विधिक संपदा पश्चात्वर्ती साम्यिक संपदा के लिए स्थगित की जाएगी।

जहां विधिक संपदा का स्वामी बंधकदार बंधककर्ता को बंधक संपत्ति पर धन उठाने के प्राधिकार के साथ अपना अभिकर्ता निर्धारित करता है और सृजित संपत्ति उस अभिकर्ता को कपट या दुराचार के द्वारा संपदा के रूप में दर्शायी गई है।

  1. इस नियम के प्रवर्तन के लिए विधिक अधिकारी की ओर से मात्र असावधानी या प्रज्ञा की कमी पर्याप्त कारण नहीं होंगे। इसमें कपट और मौन सहमति या सहायता अवश्य होनी चाहिए। अन्य कुछ नहीं। केवल कपट स्थगित करेगा।

(1913) 2 सी.एच. 18