332 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
(1) सूचना किसके द्वारा दी जानी है - समनुदेशन द्वारा या समनुदेशिती द्वारा।
(2) सूचना किस समय दी जानी है ताकि यह समनुदेशिती द्वारा समनुदेशक की मृत्योपरांत दी जा सके।
सूचना के अभाव का प्रभाव
- सूचना का अभाव समनुदेशिती को समनुदेशन पर वाद लाने के हक से वंचित नहीं करता है। यह केवल कुछ नियोग्यताओं में अधिरोपित करता है। उसकी वजह से कुछ हानियां हो जाती हैं।
(i) समनुदेशिती मूल ऋणदाता को कार्यवाही में पक्षकार बनाए बिना ऋणी पर दावा (मुकद्दमा) नहीं कर सकता है।
(ii) समनुदेशिती समनुदेशन के दिनांक से पूर्व मूल ऋणदाता एवं ऋणी के बीच उद्भूत साम्याओं के अधीन होगा और यदि ऋणी मूल ऋणदाता के ऋण को चुकता कर देता है तो समनुदेशिती अपने अधिकार को खो बैठेगा। दूसरी ओर यदि ऋणी मूल ऋणदाता (उत्तमर्ण - साहूकार-महाजन) को सूचना पाने के बाद चुकता करता है तो समनुदेशिती इस पर भी उससे ऋण वसूल कर सकता है।
(iii) समनुदेशिती जो ऋणी को अपने समनुदेशन की सूचना देने में असफल रहता है मूल्यार्थों पश्चात्वर्ती समनुदेशन जिसको पूर्ववर्ती समनुदेशन की सूचना नहीं है और अपने समनुदेशन की सूचना ऋणी को देता है, के लिए स्थगित कर दिया जाएगा।
एक विधिक व्यवहार्य संपत्ति के साम्यिक समनुदेशन
एक समनुदेशन जो संविधिक अपेक्षाओं को पूरा नहीं करता है, आवश्यकतः निष्प्रभाव नहीं होता क्योंकि वह साम्यिक समनुदेशन के रूप में प्रवर्तित हो सकता है।
दो बातें आवश्यक हैंः-
(1) समनुदेशक द्वारा मूल्य दिया गया हो।
(2) ऋणी (देनदार) एवं साहूकार (लेनदार) के बीच इकरार द्वारा विशिष्ट निधि पर सर्जित भार या ऋणों से संबंधित धन को रखने वाले व्यक्ति के संबंध में साहूकार को दिया गया आदेश, एक के समान माना जाएगा।
1839 बर्न बनाम कारवाल्लो 4 हिल्ली एंड क्रेग की रिपोर्ट 690
तथ्यः-
फ को र के पास, जो एक दूसरे नगर में व्यापार कर रहा था, सामान का पारेषण भेजने की आदत थी और वह र के प्रति हुंडी लिखा करता था। फ ने ब एंड कं के साथ यह व्यवस्था की थी कि उन्हें प्रेषित माल के प्रति र पर निकाली गई उसकी