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हुंडियों को पृष्ठांकित कर परक्राम्यित करना चाहिए और उन्हें धन के साथ उसे आकलित करना था और उसे उस पर धन प्राप्त करना था। ब एंड कं को र से धन लेकर अपनी क्षतिपूर्ति करनी थी।
फ ने ब एंड कं के प्रति कुछ धन लिया किंतु र भुगतान की दिनांक को हुंडियों का भुगतान करने में असफल रहा।
फ जो ब एंड कं को प्रेषित पत्र द्वारा ब एंड क का ऋणी था ने वायदा लिया कि वह निर्देशित करेगा और एक पश्चात्वर्ती पत्र द्वारा ब एंड कं के अभिकर्ता के रूप में ब को सामान देने के लिए निर्देशित भी किया। फ ने र को उसके अधिकार में सामान को ब एंड कं. के अभिकर्ता व को शहर में प्रदान करने को लिखा। तदनुसार र ने ब को 30 जून 1829 को सामान दे दिया। 23 जून 1829 को किए गए एक कृत कार्य के लिए फ को 23 मई 1829 को दिवालिया निर्णीत कर दिया गया था - दिवालियापन के अंतराल में फ के न्यासी ने ब एंड कं. के विरुद्ध सामान का मूल्य वसूल करने के लिए वाद फाइल किया। ब एंड कं. की दलील थी कि फ द्वारा सामान के मूल्य का साम्यिक समनुदेशन या अभिनिर्धारित किया गया आदेश साम्या में एक अच्छा समनुदेशन है।
रोडिक बनाम गनडैल
(1851-2) डिजैक्स 763.42 ई.आर. 749
गनडैल एक इंजीनियर था और बहुत-बहुत बड़ी रकम का बैंक का ऋणी था और बैंक ऋण चुकाने के लिए दबाव डाल रहा था।
गनडैल एक रेलवे कंपनी का साहूकार था। भुगतान का दबाव न डालने और उसके प्रति अवशिष्ट ड्राफटों का भुगतान करने के लिए भी बैंक को प्रेरित करने के लिए यह व्यवस्था की थी कि गनडैल अपने सालिसिटर को रेलवे कंपनी से उसके देय धन को वसूल करने और उसे बैंक को अदा करने के लिए अनुदेशन करेगा। (गनडैल) ने एक पत्र द्वारा कंपनी के सालिसिटर को प्राधिकृत किया रेलवे कंपनी से उसके देय धन को वसूल करने और उसे बैंकर को अदा करने के लिए सालिसिटर ने उस धन को रेलवे से प्राप्त होने पर उसे बैंकर्स को अदा करने का वायदा किया।
क्यों - साहूकार और ऋणी के बीच कोई करार नहीं। सालिसिटर ने रेलवे कंपनी से धन वसूल किया किंतु उसे बैंक को अदा करने के बजाए उसे गनडैल को संदाय किया। गनडैल दिवालिया हो गया और उसका कब्जा सरकारी समनुदेशिती ने ले लिया। बैंक ने एक पॉलिसी के लिए वाद फाइल किया कि गनडैल ने अपने सालिसिटर के द्वारा रेलवे से अध्यर्थनीय धन निधियों पर साम्यिक समनुदेशन किया था। अतः बैंक सरकारी समनुदेशिती से धन वसूल करने के लिए समनुदेशिक एवं समनुदेशिती के बीच संपर्क अवश्य होना चाहिए। यदि संपर्क नहीं है तब साम्या में भी कोई साम्यिक