लोक प्रशांति के विरुद्ध अपराधों से संबंधित है। - Page 35

18 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

या प्रमुख के राज्य क्षेत्र के साथ ब्रिटिश भारत अभिप्रेत रहेगा जिसका प्रयोग भारत के गवर्नर जनरल या भारत के गवर्नर जनरल के अधीनस्थ कोई अन्य अधिकारी के माध्यम से किया जाए।

ब्रिटिश भारत, 1897 के साधारण अधिनियम के खंड 3 (7) में परिभाषित है -

ब्रिटिश भारत से हिज मैजिस्टी के अधिक्षेत्रों के भीतर के वे सब राज्य क्षेत्र और स्थान अभिप्रेत होंगे जो हिज मैजिस्टी द्वारा भारत के गवर्नर जनरल द्वारा या भारत के गवर्नर जनरल के अधीनस्थ किसी राज्यपाल या अन्य अधिकारी के माध्यम से तत्समय महामहिम द्वारा शासित होंगे।

ब्रिटिश भारत - बृ. भा. + 3 मील

8 बम्बई एच.सी.आर. कि.सी. 63

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दंड संहिता के अधीन अपराधों के लिए किनका विचारण किया जा सकता है।

धारा 31 भा.दं.सं.-

सपरिषद् भारत के वायसराय द्वारा पारित किसी भी विधि द्वारा कथित क्षेत्र की सीमाओं के परे किए गए अपराध के लिए विचारण किए जाने को उत्तरदायी किसी व्यक्ति के साथ कथित क्षेत्र के बाहर किए गए किसी कार्य के लिए इस संहिता के प्रावधानों के अनुसार उसी ढंग से कार्रवाई की जाएगी मानो ऐसा कार्य कथित क्षेत्र की सीमाओं के अंतर्गत किया गया था।

धारा 41 भा.दं.सं. - इस संहिता के प्रावधान किसी भी अपराध पर लागू हो

(1) ब्रिटिश भारत के परे या बाहर किसी स्थान पर महामहिम की प्रजा किसी

देशज भारतीय के........।

(2) भारत में किसी देशज राजा या प्रमुख की क्षेत्रीय सीमाओं के अंतर्गत किसी

अन्य ब्रिटिश प्रजा के .........।

(3) भारत में किसी देशज राजा या प्रमुख की क्षेत्रीय सीमाओं के अंतर्गत साम्राज्य

का सेवक चाहे वह ब्रिटिश प्रजा हो या नहीं...

स्पष्टीकरणः- इस धारा में अपराध शब्द ब्रिटिश भारत के बाहर किया गया कोई कार्य है जो यदि ब्रिटिश भारत में किया जाता तो इस संहिता के अधीन दंडनीय होता।

अधिनियम की धारा 7(1)

इस धारा के अधीन ऐसी रियासत (राज्य) का राजनैतिक अभिकर्ता डी.एस. (जनपद मजिस्ट्रेट) - जिलाधिकारी या मुख्य प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट को संबोधित अधिपत्र द्वारा अपराधी के समर्पण की मांग कर सकता है परन्तु वह अपराधी यूरोपीय ब्रिटिश प्रजा