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वह न केवल स्वयं भागीदारों और मृत्योपरांत उनके प्रतिनिधियों के बीच भागीदारी की परिसंपत्तियों के वितरण के उद्देश्य से पर्सनेलिटी मानी जाती है वरन् यह एक मृतक भागीदार को संपत्ति के लिए हकदार व्यक्तियों के बीच विरासत के प्रयोजन के लिए भी वह पर्सनेलिटी मानी जाती है।
भागीदारी अधिनियम के अंतर्गत रियलिटी का पर्सनेलिटी में संपरिवर्तन भागीदारी के विघटन या भागीदार की मृत्यु के दिनांक को नहीं वरन् उस समय त्यों ही हो जाता है ज्यों ही वह भागीदारी संपत्ति हो जाती है।
परिवर्तन का सिद्धांत भागीदारों की रियलिटी संपत्ति पर लागू होता है जब तक कि इसके विपरीत आशय प्रतीत न हो। भागीदारी का करार रियलिटी को पर्सनेलिटी में क्यों संपरिवर्तित करता है। इसका कारण यह है कि भागीदार सामान्यतः भागीदारी के विघटन पर किसी विशिष्ट भाग का हकदार नहीं होता बल्कि भागीदारी के करार में भागीदार को एक विशिष्ट संपत्ति को रखने की अनुज्ञा देने वाला एक परंतुक हो सकता है, ऐसी स्थिति में विपरीत आशय होने से संपरिवर्तन लागू नहीं होगा।
2. न्यायालय के आदेश द्वारा संपरिवर्तन
- जहां न्यायालय द्वारा रियलिटी को बेचने के आदेश किए जाते हैं, वहां रियलिटी उस व्यक्ति की जिसकी संपत्ति बेचने का आदेश दिया गया था संपदा के उत्तराधिकार के प्रयोजनों के लिए वह पर्सनेलिटी में परिवर्तित मानी जाती है।
दृष्टांतः- अ ब स एक रियलिटी में समान अंश रखते हैं। न्यायालय उस संपत्ति में अंशों को पर्सनेलिटी में संपरिवर्तित करने का प्रभाव रखता है ताकि वे व्यक्ति जो उत्तराधिकार पाने के हकदार होंगे वे निकट संबंधी होंगे न कि वारिस।
- निम्नलिखित सूत्रों पर अवश्य ध्यान दिया जाएः-
(i) विक्रय का आदेश न्यायालय की अधिकारिता में हो।
(ii) यह महत्त्वहीन है कि क्या वह प्रयोजन जिसके लिए वह बेची जाती है, विक्रय आगमों को निःशेवित करेगा अथवा नहीं। विक्रय मात्र खर्च अदा करने के लिए हो सकता है। इस पर भी यदि विक्रय आदेश अधिकारिता में है तो इससे परिवर्तन हो जाएगा।
(iii) यह महत्त्वहीन है कि क्या वह वस्तु वास्तव में बेची जाती है या बेचने को आदेशित है। संपरिवर्तन करने के लिए विक्रय आदेश पर्याप्त है।
(iv) संपरिवर्तन विक्रय आदेश से घटित हो जाता है न कि विक्रय के दिनांक से।
- ऐसे दो मामले हैं जिनमें न्यायालय का आदेश विरासत के प्रयोजन के लिए