340 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
संपरिवर्तन को प्रभावी नहीं करेगा -
(i) जहां न्यायालय स्वयं यह आदेश करता है कि संपत्ति की प्रकृति में इस प्रकार का संपरिवर्तन मृत्यु हो जाने पर उसकी विरासत को प्रभावी नहीं करेगा। वहां उस वाद में विक्रय आगम वारिस को मिलेंगे। निकट संबंधी को नहीं।
(ii) जहां किसी कानून का प्रावधान, संपत्ति की प्रकृति में संपरिवर्तन को उसके न्यायगमन को प्रभावी करने से निषिद्ध करता है - जैसे पागलपन अधिनियम (न्यूनेसी एक्ट) 1890 की धारा 123 उपबंध करती है कि यदि पागल की संपत्ति बेची जाती है तो विक्रय आगम उनके हकदार व्यक्तियों को जाएंगे मानों वह संपत्ति बेची नहीं गई हो।
3. संविदा के प्रवर्तन द्वारा संपरिवर्तन
जब रियलिटी संपत्ति को बेचने के लिए आबद्ध कर संविदा है तो रियलिटी संपत्ति विक्रेताओं की पर्सनेलिटी संपत्ति के एक भाग के रूप में मानी जाती है। विपरीततः क्रेता का हित रियलिटी संपत्ति माना जाता है, भले ही वह संपन्न होने से पूर्व मर जाए।
तो भी एक शर्त के अधीन है। अर्थात् संविदा निश्चय ही ऐसा हो जिसका विशिष्ट पालन न्यायालय द्वारा आदेशित किया जाएगा -
34 सी.एच.डी. 1661।
मात्र मानने की सूचना संपरिवर्तन के सिद्धांतों को प्रवर्तन में लाने के लिए पर्याप्त नहीं है। यदि संविदा निष्क्रिय या अप्रवर्तनीय है तो परिवर्तन नहीं होगा।
4. क्रय के विकल्प के साथ पट्टठ्ठा करने की संविदा के अधीन संपरिवर्तन
अ एक संपत्ति का ब के नाम सात साल के लिए पट्टठ्ठा करता है और साथ ही उसको पट्टठ्ठे द्वारा इस अवधि में एक संपत्ति को क्रय का विकल्प प्रदान करता है। ब अपने विकल्प का प्रयोग करता है। तीन प्रश्न उत्पन्न होते हैंः-
(i) क्या विकल्प के प्रयोग से परिवर्तन हो जाता है?
(ii) क्या सह संपरिवर्तन तब नहीं करता है जब विकल्प का प्रयोग पट्टठ्ठाकर्ता की मृत्यु के बाद किया जाता है?
(iii) किस दिनांक से संपरिवर्तन का प्रवर्तन आरंभ होता है?
1. क्या विकल्प का प्रयोग परिवर्तन करता है?
विधि के अंतर्गत दिया गया विकल्प विक्रय का एक प्रस्ताव है। विकल्प का प्रयोग प्रस्ताव की स्वीकृति है और जब प्रस्ताव की स्वीकृति है तो, वही एक संविदा है। विकल्प का प्रयोग संविदा में फलित होने से संपरिवर्तन करता है। अतएव प्रथम प्रश्न का उत्तर सकारात्मक है।