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2. पट्टठ्ठेदार की मृत्यु से पूर्व और पट्टठ्ठाकर्ता की मृत्योपरांत विकल्प का प्रयोग
- यदि पट्टठ्ठेदार अपने विकल्प का प्रयोग पट्टठ्ठाकर्ता की मृत्यु से पूर्व अर्थात् जबकि
वह जीवित है, करता है तब संपरिवर्तन है क्योंकि विकल्प द्वारा संप्रेषित प्रस्ताव
विधिकतः स्वीकृत हो सकता है और एक आबद्ध कर संविदा हो सकती है। 2. यदि पट्टठ्ठेदार विकल्प का प्रयोग मृत्युपरांत करता है तो सिद्धांततः संपरिवर्तन का
होना निश्चित नहीं है, क्योंकि तब संविदा नहीं हो सकती है। एक प्रस्ताव, व्यक्ति
के बाद जिसने उसे प्रस्तावित किया था, मृत है, स्वीकृत नहीं हो सकता है।
किंतु लाएस बनाम बैनट (1785) 1 क्स. 167 में यह अभिनिर्धारित किया गया
था कि पट्टठ्ठेदार की मृत्योपरांत भी विकल्प का प्रयोग संपरिवर्तन के प्रयोजनों के
लिए सही है।
- लाएस बनाम बैनट में नियम विलक्षण होने से उसका प्रवर्तन सीमित है। वह
पट्टठ्ठाकर्ता के अधीन दावा करने वाले व्यक्तियों के बीच ही लागू किया जाता है।
किंतु यह पट्टठ्ठाकर्ता एवं पट्टठ्ठेदार के मध्य लागू नहीं बनाया जाता है।
दृष्टांतः- अ ने एक संपत्ति का पट्टठ्ठा ब के नाम क्रय करने के विकल्प के साथ किया। परिसरों का बीमा था वे ब द्वारा विकल्प का प्रयोग करने से पूर्व आग से नष्ट हो जाती है। ब अपने विकल्प का प्रयोग करने पर अपने क्रय के भाग के रूप में बीमा धन का दावा नहीं कर सकता अर्थात् वह दावा अ और ब के मध्य है।
(1878) 7 सी.एच.डी. 858, 10 सी.एच.डी.ए.पी.पी. 386
(iii) किस दिनांक से संविदा द्वारा संपरिवर्तन प्रवर्तित होना आरंभ होता है?
संपरिवर्तन उसी क्षण से प्रवर्तनीय हो जाता है जब संविदा संपन्न हो जाती है।
क्रय किए जाने के विकल्प के विषय में जैसे ही पट्टठ्ठे का निष्पादन होता है,
संपरिवर्तन घटित हो जाता है।
- लाभों आदि के प्रयोजन के लिए जब तक विकल्प का प्रयोग नहीं किया जाता
है तब तक संपत्ति रीयल संपत्ति रहती है ताकि किराया एवं लाभ रियलिटी
के हकदार वारिस द्वारा लिए जाए।
- न्ययगमन के प्रयोजनों के लिए वह पर्सनेलिटी है।
स्वामी के निदेश द्वारा संपरिवर्तन - चाहे एक विलेख में या विल में अंकित हो
- एक विलेख या विल से संपरिवर्तन के लिए दो बातें आवश्यक हैंः-
(i) रियलिटी निजी संपत्ति के विक्रय या क्रय का निदेश अवश्य होना चाहिए।
(ii) कोई व्यक्ति विद्यमान अवश्य होना चाहिए, जो निदेश का पालन कराने के