सामान्य विधि - Page 359

342 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

विषय में आग्रह करने का अधिकारी कहा जा सके। संपरिवर्तन हमेशा किसी व्यक्ति के लाभ के लिए होता है। यदि लाभ के लिए दावा करने वाला कोई व्यक्ति नहीं है तब संपरिवर्तन आवश्यक नहीं होता है।

  1. संपरिवर्तन करने की दृष्टि से निदेश आज्ञात्मक अवश्य होना चाहिए। यदि

निदेश मात्र वैकल्पिक है तो कोई संपरितवर्तन नहीं होगा और संपत्ति निजी

संपत्ति या भू संपत्ति के रूप में उसकी वास्तविक अवस्थिति जिसमें वह पाई

जाती है, के अनुसार मानी जाएगी।

टिप्पणीः- ऐसे निदेश जो वस्तुतः वैकल्पिक हैं और ऐसे निदेश जो प्रकटतः वैकल्पिक वरन् वस्तुतः आज्ञात्मक हैं के अंतर के लिए देखिए -

अर्लोम बनाम साँडर्स (1754) एम्बलर्स रिपोर्ट्स 241

यदि निदेश वैकल्पिक है तो वह अभिव्यक्त हो अन्यथा वह सर्वदा आज्ञात्मक माना जाएगा।

  1. रियलिटी (निजी संपत्ति) के विक्रय अथवा क्रय के लिए निदेश और वह

समय जिस पर विक्रय अथवा क्रय किया जाएगा, के विषय में विवेकाधिकार

के बीच भेद अवश्य होना चाहिएः-

(अ) यदि निदेश आज्ञात्मक है तो मात्र यह तथ्य कि वह

विवेकाधिकार के साथ है, संपरिवर्तन प्रभावी रखने से निवाहित नहीं

करेगा।

(ब) यदि निदेश आज्ञात्मक है तो यह तथ्य कि वे जिनको निदेश

दिया गया था, उसके अनुपालन में असफल हो गए हैं, संपरिवर्तन को

अपना प्रभाव रखने से निवारित नहीं करेगा।

  1. विक्रय या क्रय के मात्र निदेश और इस निदेश जिसका निष्पादन किसी अन्य

व्यक्ति के अनुरोध या सम्मति पर निर्भर किया जाता है, के बीच भेद अवश्य

किया जाना चाहिए।

ऐसे मामले में संपरिवर्तन होगा या नहीं यह दस्तावेज के अर्थान्वयन पर निर्भर करता है।

(अ) यदि खंड का आशय नामित व्यक्ति को संपरिवर्तित करने के कर्त्तव्य को

लागू करने के योग्य बनाना है तब संपरिवर्तन होगा।

(ब) यदि खंड का आशय निदेश को उपयोग के अधीन बनाकर उसे नियंत्रित

करना है, तब जब तक इस प्रकार उपयोग नहीं किया जाता है कोई

संपरिवर्तन नहीं होगा।