सामान्य विधि - Page 360

343

  1. संपरिवर्तन करने की शक्ति एवं संपरिवर्तन करने के निदेश में अंतर अवश्य

करना चाहिएः

(1892) 1 सी.एच. 279

(1910) 1 सी.एच. 750

मात्र संपरिवर्तन करने की शक्ति आज्ञात्मक नहीं है और वहां संपरिवर्तन नहीं होगा जहां केवल शक्ति है।

दृष्टांतः

अ 300 पाउंड अ की संपत्ति को ब के पास बंधक कर ब से उधार लेता है और ब को विक्रय करने की शक्ति प्रदान करता है, जिसकी शर्त यह है कि विक्रय भाग पर आधिक्य अ द्वारा उसके निष्पादकों एवं प्रशासकों को अदा किया जाएगा।

अ बिना वसीयत किए मर गया और अ की मृत्योपरांत ब ने संपदा बेच दी और वहां अतिरिक्त आगम विक्रय थे।

वह अतिरिक्त धन किस के पास जाएगा?

चूंकि उसे विक्रय करने का निदेश नहीं था, इसलिए संपत्ति का अ की मृत्यु के समय उसकी वास्तविक अवस्थिति के अनुसार आगमन होगा। अ की मृत्यु के समय वह एक रियलिटी संपत्ति थी, अतः वारिस उसका हकदार था। यदि विक्रय अ के जीवन काल में हो जाता तो अ की मृत्यु पर वह पर्सनेलिटी (संपत्ति) होती, अतएव वह निकट संबंधी को जाती।

II. समय, जिससे निदेश द्वारा संपरिवर्तन होता है।

  1. यह एक विल या विलेख में अंकित निदेश के अनुसार भिन्न-भिन्न होता है।

  2. यदि निदेश विल में अंकित है तो संपरिवर्तन वसीयतकर्ता की मृत्यु से होगा।

  3. यदि निदेश एक विलेख में अंकित है तो संपरिवर्तन विलेख के निष्पादन के दिनांक से प्रवर्तित होगा - भले ही वसीयतकर्ता की मृत्योपरांत भी विक्रय या क्रय करने का न्यास उत्पन्न न हो।

III. उन उद्देश्यों की जिनके लिए विल या विलेख में निदेश किया गया था असफलता का प्रभाव

  1. दो वादों में अवश्य भेद करना चाहिएः-

(1) पूर्ण असफलता के बाद।

(2) आंशिक असफलता के बाद।

(1) पूर्ण असफलता के बाद

जहां उद्देश्यों की पूर्ण असफलता उसी समय है या उससे पूर्व होती है, जब विलेख