सामान्य विधि - Page 362

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रद्दकरण। यह संपत्ति की धारणात्मक अवस्थिति से उसकी वास्तविक स्थिति में प्रत्यावर्तन या पुनःस्थापन है।

  1. प्रतिसंपरिवर्तन दो तरह हो सकता है -

(1) पक्षों के कार्य द्वारा।

(2) विधि के प्रवर्तन द्वारा।

(1) पक्षों के कार्यों द्वारा

  1. यह वहां होता है जहां एक व्यक्ति की संपत्ति को उसकी संपरिवर्तित स्थिति या उसकी वास्तविक स्थिति में लेने के बीच चुनने का अधिकार होता है।

  2. वे व्यक्ति जिनको इस प्रकार चुनाव करने का और तद्द्वारा उसको संपरिवर्तित करने का अधिकार हैः-

(1) पूर्ण स्वामी।

(2) एक अविभाजित अंश का स्वामी। भूमि को धन के रूप में संपरिवर्तित करने के मामले में यह स्वामी की सहमति के बिना किंतु भूमि को धन में संपरिवर्तित करने के मामले में नहीं। यह इस कारण है कि धन विभाजन योग्य है भूमि नहीं।

दृष्टांतः-

(1) जहां धन सह अभिधारियों के रूप में अ एवं ब के हित में भूमि में निवेशित किया जाता है। अ ब की सहमति के बिना संपरिवर्तन करने का चुनाव कर सकता है।

(2) प्रश्नः- क्या एक अवशेष पुरुष उसे उसकी वास्तविक स्थिति में लेने के चुनाव के द्वारा प्रतिसंपरिवर्तन को प्रभावी कर सकता है? यह स्पष्टतः सुनिश्चित नहीं है।

(3) पक्षों के कार्य द्वारा प्रतिसंपरिवर्तन करने का यह नियम वहां प्रवर्तित होता है जहां स्वामी, जिसको चुनाव करने का अधिकार है और एतद्द्वारा प्रतिसंपरिवर्तन को प्रभावी करना इस सीमा के अधीन है कि वह किसी निर्योग्यता के अधीन न हो।

शिशु एवं पागल निर्योग्यता के अंतर्गत आते हैं। अतः वे प्रतिसंपरिवर्तन नहीं कर सकते। किंतु न्यायालय उनके पक्ष में निदेश कर सकता है यदि वह उनके लिए लाभकारी है।

विवाहित महिला, यदि संपत्ति उसके पृथक उपयोग के लिए उससे संबंधित है तो प्रति-संपरिवर्तित कर सकती है। यदि वह उसकी पृथक संपत्ति नहीं है तो वह केवल अपने पति की सहमति से ही ऐसा कर सकती है।

(4) प्रतिसंपरिवर्तन के चुनाव का साक्ष्यः-

(1) उस निमित्त आशय की स्पष्ट घोषणा।

(2) चुनाव करने के समान आचरण।