सामान्य विधि - Page 363

346 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. विधि द्वारा प्रतिसंपरिवर्तनः- जहां एक व्यक्ति जो संपत्ति को संपरिवर्तित करने के कर्त्तव्य के अधीन है, कर्त्तव्य के समाप्त हो जाने के बाद, संपत्ति को कब्जे में रखने और उसके प्रति पूर्ण हकदार है, संपत्ति घर पर ही है और उसके द्वारा कुछ भी किए बिना प्रति-संपरिवर्तित हो गई। इस प्रकार हैः-

अ, ब के साथ शादी होने के बाद तीन वर्षों में 1000 पाउंड भूमि क्रय करने में निवेश करने और उन्हें अपनी पत्नी ब पर निर्धारित करने में संपरिवर्तन करता है। ब विवाहोपरांत एक वर्ष के अंदर मर जाती है। चूंकि भूमि में निवेश करने का कर्त्तव्य और उसके निवेशन को प्राप्त करने का अधिकार दोनों ही अ में निहित हैं। इस बाध्यता का उन्मोचन विधिक प्रवर्तन द्वारा होता है और वह जो प्रसंविदा द्वारा भूमि में निवेशित किया गया था पुनः संपरिवर्तित हो जाता है और निकट संबंधी को चला जाता है।

चुनाव

  1. विधिक चुनाव एवं साम्यिक चुनाव में अंतरः-

(अ) विधिक चुनाव एक पक्ष के एक अनधिकृत कार्य से उद्भूत होने वाले दायित्व को खंडित करने या कार्य को अनुसमर्थन करने एवं दायित्व को स्वीकार करने की पसंद से संबद्ध होता है।

(ब) साम्यिक चुनाव एक व्यक्ति के एक उपहार को जो एक भार के रूप में है स्वीकार करने या उपहार को अस्वीकार करने में से चुनाव से संबद्ध होता है।

II. चुनाव के साम्यिक सिद्धांत की आवश्यकता

  1. यह सिद्धांत किस समस्या के बारे में है।

समस्या की प्रकृति

अ एक विलेख पत्र या विल द्वारा अपनी संपत्ति ब को देता है और उसी दस्तावेज द्वारा ब की एक संपत्ति स को देता है। ऐसी लिखित के अधीन ब क्या प्राप्त कर सकता है?

यहां दो दान हैं -

(1) अ द्वारा ब को अ की संपत्ति।

(2) अ द्वारा स को ब की संपत्ति।

अ की संपत्ति का ब को दान वैध है, क्योंकि अ दान की गई संपत्ति का स्वामी है। अ द्वारा ब की संपत्ति का दान अवैध है, क्योंकि ब द्वारा वह प्राधिकृत नहीं की गई है। प्रश्न है कि क्या ब अ द्वारा दान में दी गई अ की संपत्ति को ले सकता है और अ द्व ारा स को दान में दी गई ब की संपत्ति को रद्द कर सकता है। चुनाव का सिद्धांत इसी समस्या के बारे में है।