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(ii) चुनाव के सिद्धांत में विहित है कि ब को दान तभी प्रभावी होगा जब स को दान प्रभावी होने देने के लिए ब अनुमति देता है।
III. नियम का सिद्धांत
जब कोई व्यक्ति इस प्रकार कोई दान करता है तो साम्या उपधारित करती है कि ऐसे दान में एक निहित शर्त होती है कि वह व्यक्ति जो लिखित के अंतर्गत फायदा स्वीकार करता है उसके सभी प्रावधानों के अनुरूप और उससे असंगत प्रत्येक अधिकार का त्याग करते हुए उसे समग्रतः स्वीकार करता है।
(iii) चुनाव करने का आहूत व्यक्ति के लिए विकल्प
(अ) जिस व्यक्ति को चुनाव करने के लिए आहूत किया जाता है उसके लिए दो विकल्प होते हैंः-
(1) ब अपनी (ब की) संपत्ति लेने को स को अनुज्ञात कर सकता है और अ की संपत्ति स्वयं लेता है।
(2) अ की संपत्ति को ब ले सकता है और स को उसकी (ब की) संपत्ति को लेने के लिए अनुज्ञात नहीं करता है वरन् स की तुष्टि करने के लिए उस सीमा तक प्रतिपूर्ति करता है।
दृष्टांतः- अ 20,000 पाउंड मूल्य की संपत्ति से संबंधित पारिवारिक संपदा ब को प्रदान करता है और उसी लिखित द्वारा अ अपनी (अ की) 30,000 पाउंड की संपत्ति की वसीयत स को प्रदान करता है। स दोनों बातों में से किसी एक को कर सकता है।
(1) ब को पारिवारिक संपदा लेने के लिए ज्ञात करे या
(2) पारिवारिक संपदा को रख ले और ब को 20,000 पाउंड दे।
(ब) पहला विकल्प लिखित के अधीन लेना कहलाता है पश्चात्वर्ती लिखित के प्रतिकूल लेना कहलाता है। निम्न विचार बिंदु इन दो चुनाव करने के ढंगों के संबंध में अवश्य जान लेने चाहिएः-
(i) लिखित पर चुनाव की अनुमति केवल वहीं दी जाती है जहां दान एक निहित शर्त पर किया जाता है कि आदाता अपनी संपत्ति को विलग करेगा। जहां दान एक अभिव्यक्ति शर्त पर किया जाता है कि आदाता अपनी संपत्ति को विलग करेगा। साम्या लिखित पर चुनाव की अनुमति नहीं देगी। आदाता कुछ नहीं ले पाएगा यदि वह शर्त का अनुपालन करना अस्वीकार करता है।
(ii) जब किसी व्यक्ति का चुनाव लिखित के अधीन होता है तो मुआवज़े का प्रश्न उत्पन्न नहीं होता।
(iii) लिखित के विपरीत चुनाव जहां अनुज्ञात किया जाता है - संपूर्ण