सामान्य विधि - Page 365

348 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

वसीयती संपत्ति का समपहरण नहीं करता। वरन् प्रतिकार के लिए पर्याप्त एक भाग को ही।

IV. सिद्धांत के लागू होने की शर्तें

  1. दाता ने आदाता की संपत्ति किसी तीसरे व्यक्ति को दे दी हो।

  2. दाता ने स्वसंपत्ति उसी विलेख द्वारा आदाता को दी हो।

  3. आदाता को दी गई संपत्ति ऐसी हो कि वह तीसरे व्यक्ति की क्षतिपूर्ति के लिए प्रयोज्य हो सके।

  4. आदाता की संपत्ति अन्य संक्राम्य होनी चाहिए।

टिप्पणीः- आदाता को ऐसे हित का ही व्ययन करने वाला समझा जाएगा जैसा कि वह संपत्ति में रखता है, अधिक नहीं।

V. कुछ वाद जो चुनाव के वादों से अवश्य प्रभेदित होने चाहिए

  1. एक व्यक्ति को दो दान के वाद।

ऐसे वादों में चुनाव का सिद्धांत लागू नहीं होता। वे उसकी स्व-संपत्ति के दानों के वाद है।

यहां आदाता एक को स्वीकार कर सकता है जो लाभकारी है और दूसरे को अस्वीकार कर सकता है जो भारित है - जब तक कि दाता का आशय यह न हो कि भारित को स्वीकार करना लाभकारी के अनुदान की एक शर्त है।

  1. एक दान में दो संपत्तियों के वाद - एक लाभकारी, दूसरी भारित। लाभग्राही दोनों को ले या एक को भी नहीं, जब तक यह आशय न हो कि एक के बिना दूसरी को लेने की अनुमति दी जाए।

VI. उपसंहार

  1. संपरिवर्तन एवं चुनाव के सिद्धांत है जो साम्या की सूक्ति को स्पष्ट करते हैं - साम्या आशय को देखती है।

वह दोनों का अपवाद है?

57 कलकत्ता 1062

(तृतीय) के संबंध में

मामला धारा 24 से विनियमित होता है।

स्पष्टीकरण - 1 प्राधिकारी व्यक्ति।

2. उपस्थित होता है।

ध्यान में रखने की बातेंः