20 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
में चोरी की गई संपत्ति के साथ पाया गया, तो वहां ब्रिटिश भारतीय न्यायालय को उसे चोरी के अपराध के लिए विचारित करने की अधिकारिता नहीं थी। तो भी उसे चोरी की संपत्ति को रखने के अपराध में विचारित करने की अधिकारिता थी।
10, बम्बई 186
पाया गया - उसका अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति कहां खोजा गया, वरन् यह है कि वह वास्तव में कहां उपस्थित है, चाहे वह स्वयं अपने आप आता है या गिरफतार करके लाया जाता है।
6, बम्बई 622
इस धारा के अधीन विचारण इस तथ्य के कारण दूषित नहीं किया जाएगा कि अभियुक्त एक विदेशी राज्य क्षेत्र से अवैध गिरफतारी के अधीन ब्रिटिश भारत में लाया गया है।
13 बम्बई एल.आर. 296
धारा 106 एवं 107 खतरनाक झगड़ों के बारे में है
धारा 106 निम्नलिखित विषयों के बारे में हैः-
कोई व्यक्ति धारा 143, 149, 153ए एवं 154 के अधीन दंडनीय अपराध से भिन्न भा.दं.सं. के अध्याय 8 के अधीन दंडनीय किसी अपराध या हमला या शांति भंग के अंतर्गत आने वाले अन्य अपराध या उसको या अपराधिक अभित्रास करने वाले अभियुक्त व्यक्ति को उत्तेजित करने वाले अभियुक्त, अभित्रास सिद्ध दोष है और ऐसा न्यायालय इस मत का है कि ऐसे व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र निष्पादित कराने की अपेक्षा करना आवश्यक है, ऐसा न्यायालय उसको दंडादेश करते हुए तीन वर्ष से अनाधिक ऐसी विधि के लिए जो वह नियत करना ठीक समझे उसके साधनों के अनुपात में रकम का बंधपत्र प्रतिभूतियों के सहित या बिना निष्पादित करने का आदेश देता है।
यदि दोष सिद्धि अपील करने पर या अन्यथा रद्द कर दी जाती है, तो इस प्रकार निष्पादित बंधपत्र शून्य हो जाएगा।
उच्च न्यायालय पुनरीक्षण में प्रतिभूति की मांग कर सकता है।
टिप्पणी - शांति भंग को अंतर्ग्रस्त करने वाले दो निर्वचन -
(1) ये शब्द उन अपराधों का निर्देश करते हैं जिनमें शांति भंग एक आवश्यक तत्व है और उन अपराधों को नहीं तो मात्र प्रकापन करते हैं। या जिनसे शांति भंग की ओर जाना संभाव्य है।
30 कलकत्ता 366 47 मद्रास 846 (848)
(2) ये शब्द उन अपराधों को सम्मिलित करते हैं जहां हैं जहां शांतिभंग होनी संभावित है।
यह बम्बई एवं इलाहाबाद उच्च न्यायालयों का मत है ताकि धारा 504 भा.दं.सं. को