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दण्ड प्रक्रिया संहिता की सुसंगत धारा 434 है।
धारा 40 के अंतर्गत एक निर्णय सुसंगत है, यदि उसका प्रभाव न्यायालय को निष्कर्षित करता है।
ऐसा एक निर्णय उन्हीं पक्षों के बीच और उन्हीं विवाद्यकों पर होना चाहिए।
अंतर पक्षों में एक निर्णय एक अपरिचित को आबद्ध नहीं करता है। नियम के मूल में सिद्धांत है कि कोई मानव कर्यवाहियों द्वारा बाध्य नहीं हो सकता जिनके लिए वह एक अपरिचित था और जिनके ऊपर उसका कोई नियंत्रण नहीं था।
नियम का अपवाद
(1) धारा-41, अपने अंतर्गत नियम का एक अपवाद अधिनियमित करती है। एक सक्षम न्यायालय का एक अंतिम निर्णय निम्न के निष्पादन में
(i) प्रमाणित इच्छापत्र
(ii) वैवाहिक
(iii) नौ अधिकरण अधिकार क्षेत्र
(iv) दिवाला
जो एक विधिक चरित्र को प्रदान करता या ले लेता है या जो किसी व्यक्ति को किसी विशिष्ट बात का सत्वाधिकृत होने वाला घोषित करता है, सुसंगत है।
टीका -
इसका अभिप्राय है कि अंतरपक्षीय निर्णय ग्राह्य है पक्षों के मध्य की एक कार्यवाही में, जो उस कार्यवाही के पक्ष नहीं थे।
यह धारा जो निर्णय लोकबंधी कहलाते हैं के साथ कार्य करती है उस अभिव्यक्ति का प्रयोग किए बिना। सभी निर्णय अंतरपक्षीय हैं किंतु कुछ अंतरपक्षीय निर्णय, व्यक्तिबंधी निर्णय हैं और कुछ लोकबंधी निर्णय हैं। दोनों ही अंतरपक्षीय हैं। लोकबंधी निर्णयों की परिभाषा करने के स्थान पर - धारा उनकी गणना करती है।
परिणाम यह है कि प्रत्येक निर्णय जो एक चरित्र को देता या ले लेता है, स्वीकार्य नहीं है। ये एक विशेष प्रकार के अधिकार क्षेत्र के निष्पादन में दिए गए केवल निर्णय हैं, जो स्वीकार्य हैं।
दृष्टांतः-
अपरिचितों के मध्य में अंगीकरण स्वीकार्य नहीं है।
यह एक निर्णय है जो एक स्थिरता प्रदान करता है। किन्तु यह स्वीकार्य नहीं है क्योंकि यह किसी कथित अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत नहीं है।