355
धारा 7 के अंतर्गत - कारण दर्शाना, अवसर।
धारा 8 के अंतर्गत - अभिप्रेरक चरित्र।
धारा 9 के अंतर्गत - सुसंगत तथ्यों के स्पष्टीकरण के लिए आवश्यक तथ्य।
धारा 11 के अंतर्गत - विसंगत तथ्य।
धारा 13 के अंतर्गत - संव्यवहार।
- दो प्रश्न
I. क्या निर्णय एक तथ्य है?
II. क्या निर्णय एक संव्यवहार है?
6 कलकत्ता 171 एफ.बी.
- 6 कलकत्ता 171 पर टीका, वह एक तथ्य है पृ. 181
तथ्यः
(1) विवेकों के अनुभवों के योग्य वस्तु की दशा या वस्तु के संबंध की कोई बात
(2) कोई मानसिक दशा जिसके लिए कोई व्यक्ति चैतन्य है।
II. प्रलेख्य साक्ष्य
व्यवहार में आने वाला विषय है एक प्रलेख में उल्लिखित अभिकथनों का प्रमाण अर्थात् एक प्रलेख की अंतर्वस्तुओं का प्रमाण। मौखिक साक्ष्य एक पक्ष द्वारा किए गए कथन के साथ बर्ताव करता है।
एक प्रलेख की अंतर्वस्तुओं के प्रमाण के संबंध में सर्वोत्तम साक्ष्य की क्या अपेक्षाएं हैं? यह दो अपेक्षाएं हैं -
(i) कुछ मामलों में साक्ष्य प्रलेख होना चाहिए और मौखिक नहीं।
(ii) उन मामलों में जहां साक्ष्य प्रलेख्य होना चाहिए वह साक्ष्य प्राथमिक होना चाहिए।
मामले जिनमें साक्ष्य प्रलेख्य होना चाहिए
- बहुत से विषय लिखित में लिए जाते हैं। किंतु क्योंकि वे लिख लिए जाते हैं, विधि अपेक्षा नहीं करती है कि हर ऐसे मामले में, वे केवल प्रलेख के प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किए जाने के द्वारा ही प्रमाणित किए जाएंगे।
कुछ मौखिक साक्ष्य द्वारा प्रमाणित किए जा सकते हैं और अन्य प्रलेख्य साक्ष्य द्वारा ही प्रमाणित होने चाहिए।
- इस उद्देश्य के लिए यह जानना आवश्यक है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम दो प्रभेद करता है -