356 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
(1) प्रलेख जो निवर्तनात्मक अनुरूप हैं और प्रलेख जो अनिवर्तनात्मक अनुरूप है, के मध्य में।
(2) कार्रवाई जो विधि द्वारा लिखित में होनी अपेक्षित की जाती है और वे जो नहीं की जाती हैं, के मध्य में।
निवर्तनात्मक एवं अनिवर्तनात्मक। निवर्तनात्मक का अभिप्राय है वह कार्यवाही जिनमें पक्षकार अपने अधिकारों का निवर्तन करते हैं, जैसे कि एक संविदा, अनुदान आदि, अनिवर्तनात्मक का अभिप्राय है वह कार्यवाही जिनमें कोई अधिकारों का निवर्तन अंतर्ग्रस्त नहीं है।
साक्ष्य अधिनियम में उल्लिखित नियम दो परत वाला हैः-
(i) जब एक प्रलेख निवर्तनात्मक है और जब विषय ऐसा है कि विधि अपेक्षा कतार है कि उसे लिखित के लिए कोई साक्ष्य नहीं दिया जाएगा। दूसरे शब्दों में ऐसे मामलों में प्रलेख्य साक्ष्य के स्थान पर मौखिक साक्ष्य नहीं दिया जा सकता है। किंतु यदि प्रलेख अनिवर्तनात्मक अनुरूप का है तब यह ऐसा है जो विधि द्वारा लिखित में होना अपेक्षित नहीं है तब यद्यपि कार्यवाही के प्रमाण में मौखिक साक्ष्य दिया जा सकता है।
(ii) यदि कार्यवाही एक निवर्तनात्मक कार्यवाही है या ऐसी कोई है जिसका लिखित में होना विधि द्वारा अपेक्षित किया जाता है तब न केवल मौखिक साक्ष्य, प्रलेख्य-साक्ष्य के लिए प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है वरन् प्रलेख के निबंधनों में परिवर्तन करने के लिए संविदा के लिए मौखिक साक्ष्य ग्राह्य नहीं हो सकता है।
- यह नियम धारा 91-92 में अंतर्विष्ट है।
धारा 91-92 में अंतर्विष्ट हैं नियम के अपवाद
- इस नियम के अपवाद हैं। वे वर्गों में विभाजित हैं। वे पृथक रखने चाहिए। एक वर्ग उन मामलों के साथ संबंध रखता है जहां प्रश्न है कि क्या मौखिक साक्ष्य, प्रलेख्य साक्ष्य के स्थान पर प्रतिस्थापित किया जा सकता है। दूसरा उन मामलों के साथ संबंध रखता है जहां प्रश्न है कि क्या मौखिक साक्ष्य प्रलेख्य साक्ष्य, जहां नियम अपेक्षा करता है कि प्रतिस्थापित करने के लिए नहीं वरन् परिवर्तित करने के लिए साक्ष्य प्रलेख्य होगा, ग्राह्य हो सकता है।
अपवाद जो प्रलेख्य साक्ष्य के लिए मौखिक साक्ष्य अनुज्ञात करता है।
- वे धारा 91 में अंतर्विष्ट हैं और निम्नलिखित वादों को समाविष्ट करते हैं।
(i) एक लोक सेवक की नियुक्ति।
(ii) वसीयत संप्रमाण द्वारा प्रमाणित की जा सकती है।