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अप्रत्यक्ष संदिग्धता एवं प्रत्यक्ष संदिग्धता में अन्तर।
II. एक प्रलेख के विषय को किस प्रकार प्रमाणित किया जाए?
एक प्रलेख के विषय संबंध में प्रमाण के सर्वोत्तम साक्ष्य के नियम की क्या अपेक्षाएं हैं?
जैसा कि साक्ष्य अधिनियम में निर्धारित है इस संबंध में दो अपेक्षाएं हैं।
(i) एक प्रलेख के विषय को प्राथमिक साक्ष्य द्वारा प्रमाणित करना चाहिए।
(ii) प्रलेख की यथार्थता को प्रमाणित करना चाहिए।
प्राथमिक साक्ष्य का क्या तात्पर्य है?
धारा 62
- न्यायालय के निरीक्षण के लिए स्वतः प्रलेख को प्रस्तुत किया जाना प्राथमिक साक्ष्य का तात्पर्य है।
स्पष्टीकरणः-
(पांडुलिपि में स्थान खाली छोड़ा गया है - संपादक)
किस प्रकार प्रमाणित किया जाए कि प्रलेख यथार्थ है?
- यथार्थता को प्रमाणित करने के प्रयोजन के लिए साक्ष्य प्रलेखों को दो वर्गों में
विभाजित करता है। (1) सार्वजनिक प्रलेख और (2) निजी प्रलेख। 2. सरकारी प्रलेख धारा 74 में परिभाषित किया गया है।
- धारा 75 घोषित करती है कि प्रलेख जो सरकारी प्रलेख नहीं है, निजी प्रलेख हैं।
- एक प्रलेख की यथार्थता को प्रमाणित करने के लिए नियम, सरकारी प्रलेख या
एक निजी प्रलेख है, के अनुसार अंतर करते हैं।
- एक लोक-प्रलेख की यथार्थता को प्रमाणित करने की विधि धारा 76-78 में
अभिव्यक्त है।
- एक निजी प्रलेख की यथार्थता को प्रमाणित करने की विधि धारा 67-75 में
अभिव्यक्त है।
- निजी प्रलेखों को सामान्यतः हस्तलेखन, हस्ताक्षर या निष्पादन जैसे मामले में साक्ष्य
के साथ संयोजित मूल के प्रस्तुतीकरण द्वारा प्रमाणित करना चाहिए।
अपवादः- संप्रमाणन द्वारा प्रमाणित किया जा सकेगा।
- सरकारी प्रलेखों की यथार्थता या तो धारा 77 के अंतर्गत प्रमाणित प्रतिलिपियों के
प्रस्तुतीकरण द्वारा या यदि वे धारा 78 में वर्णित प्रकार के प्रलेख हों तो उस धारा
में निर्धारित विभिन्न विधियों में, प्रमाणित की जा सकेगी।