360 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- एक प्रलेख की यथार्थता के भार के संबंध में कि क्या वह सरकारी या निजी
है साक्ष्य अधिनियम कुछ धारणाएं अधिनियमित करता है, जो धारा 79-90 में
अंतर्विष्ट हैं यद्यपि वे निर्णायक धारणाएं नहीं हैं।
- ये धारणाएं निम्न वर्गों में आती हैंः-
(1) वे जिनमें न्यायालय धारणा करेगा। 79-85 एवं 89
(2) वे जिनमें न्यायालय धारणा कर सकेगा। 86-88 एवं 90
प्राथमिक साक्ष्य कब समाप्त किए जाते हैं?
(पांडुलिपि में स्थान खाली छूटा हुआ है - संपादक)
किस प्रकार एक प्रलेख के विषयों को प्रमाणित किया जाता है जहां प्राथमिक साक्ष्य संपन्न किया जाता है?
- गौण साक्ष्य द्वारा।
(पांडुलिपि में स्थान खाली छूटा हुआ है - संपादक)
साक्ष्य क्या है?
(पांडुलिपि में स्थान खाली छूटा हुआ है - संपादक)
प्रमाण का भार
विधि अपेक्षा करता है कि जिस व्यक्ति पर साक्ष्य का भार रखा जाता है वह उसको उन्मोचित करे।
इस प्रमाण के भार को उन्मोचित करने में निम्नोक्त विचारों को अवश्य ध्यान में रखना चाहिएः-
(i) ऐसे मामले हैं जिनका प्रमाण अपेक्षित नहीं होता।
(ii) ऐसे मामले हैं जिनका प्रमाण अनुमत नहीं किया जाता।
- (i) के अंतर्गत भार हल्का किया जाता है जबकि (ii) के अंतर्गत उसका भार बढ़ाया जाता है।
प्रमाण का भार
(i) मामले जिनका प्रमाण विधि द्वारा अपेक्षित नहीं है
- मामले, जिनका प्रमाण विधि द्वारा अपेक्षित नहीं है, तीन शीर्षकों के अंतर्गत आते हैंः-
(अ) मामले जो न्यायिकतः जाने जाते हैं।