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भूमि या समुद्र पर सड़क के नियम
अंतिम पैरा का प्रभाव।
कुछ परिस्थितियों के अधीन न्यायालय न्यायिक अधिसूचना लेना अस्वीकार कर सकता है, उन मामलों में जिनकी अधिसूचना लेने को वे बाध्य हैं।
न्यायालय को न्यायिक अधिसूचना लेने के लिए सक्षम बनाने हेतु पक्षकार आवश्यक सामग्री प्रस्तुत करने के लिए बाध्य है।
दृष्टांतः-
यदि पक्षकार न्यायालय से न्यायिक अधिसूचना लेने की अपेक्षा करता है तो राजपत्र अवश्य प्रस्तुत करना चाहिए।
प्रमाण की विधि
- प्रमाण की विधि के संबंध में सामान्य नियम इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है।
विधि, साक्ष्य दिए जाने की अपेक्षा करती है, एक व्यक्ति द्वारा -
(i) जो न्यायालय में उपस्थित है।
(ii) जो एक साक्षी के रूप में विधिकतः सक्षम है।
(iii) शपथ या सत्य प्रतिज्ञान पर।
(iv) परीक्षण के नियमित क्रम में।
(v) तथ्यों की प्रतिकूलता के अधीन।
(vi) सत्यता के संबंध में अविश्वास के अधीन।
(i) न्यायालय में उपस्थितिः-
न्यायकरण के लिए आवश्यक हो सकने वाले अपनी जानकारी के अंतर्गत ऐसे तथ्यों को प्रमाणित करने के लिए उपस्थित होना नागरिकों का कर्त्तव्य है। यह एक कर्त्तव्य है जो सामान्य विधि द्वारा एक प्रारंभिक काल से मान्यता प्राप्त है और लागू की जाती है।
साक्षियों की उपस्थिति को बाध्य करने का अधिकार सामान्य विधिक न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के लिए आनुषंगिक था और संविधियां इस अधिकार को अन्य अधिकारियों जैसे कि मध्यस्थों को प्रदान करती हैं। प्रत्येक न्यायालय किसी वाद में निश्चित रूप से सुनने और निर्धारित करने का अधिकार रखते हुए, अपने समक्ष साक्षियों की उपस्थिति को बाध्य कर और इस हेतु सम्मन देने और विवादित तथ्यों के सम्यक प्रमाण के लिए बुलाने का सामान्य विधि द्वारा अधिकार रखता है।