सामान्य विधि - Page 382

365

दंड प्रक्रिया संहिता 171

V. दंड कार्यवाहियों में परिवादियों एवं साक्षियों की उपस्थिति के लिए मान्यता।

दंड प्रक्रिया संहिता 217, 170

टिप्पणी - सिविल मामलों में प्रावधानित नहीं।

VI. सिविल प्रक्रिया में बंदीकरण से साक्षियों की विमुक्ति सिविल प्रक्रिया संहिता धारा - 135

टिप्पणीः दंड प्रक्रिया में कोई संरक्षण नहीं दिया गया है।

  1. न केवल साक्षी को सम्मन करने का प्रावधान है, बल्कि उसकी उपस्थिति को बाध्य करने के लिए भी प्रावधान है।

(1) एक सम्मन के आज्ञापालन में अनुपस्थिति धारा 174, 175 दंड प्रक्रिया संहिता के द्वारा अपराध करार दी जाती है।

(2) एक सम्मन के आज्ञापालन में अनुपस्थिति दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 75-86 के अंतर्गत गिरफतारी के अधिपत्र (वारंट) द्वारा और धारा 87-89 के अंतर्गत मुनादी एवं कुर्की के द्वारा अनुसरित की जा सकेगी।

(3) 1885 के XIX अधिनियम की धारा 26 के अंतर्गत और बॉम्बे एवं मद्रास में लागू 1855 के X अधिनियम की धारा 10 के अंतर्गत अनुपस्थिति एक साक्षी को सिविल कार्यवाही में उत्तरदायी बना सकेगी। (बंगाल में लागू है)। 24 डब्ल्यू.आर. 72

  1. यद्यपि विधि साक्षी के रूप में सम्मानित व्यक्तियों की वैयक्तिक उपस्थिति की अपेक्षा करती है तो विधि कुछ मामलों में अनुपस्थिति को माफ भी करती है।

(i) निश्चित सीमाओं के अंतर्गत न रहने के कारण।

सिविल प्रक्रिया संहिता आदेश XVI आर. 19

(ii) साक्षी पर्दानशीन महिला होने के कारण।

सिविल प्रक्रिया संहिता, धारा 132

(iii) साक्षी एक पदवीधारी व्यक्ति होने के कारण।

सिविल प्रक्रिया संहिता, धारा 133

साक्षी साक्ष्य देने के लिए सक्षम होना चाहिए।

  1. एक व्यक्ति की सक्षमता का प्रश्न दो दृष्टिकोणोंसे विचारणीय है।

(1) उसकी बौद्धिक क्षमता के दृष्टिकोण से।

(2) उसकी सत्यवादिता के दृष्टिकोण से।