366 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
I. प्रथम बौद्धिक क्षमता के दृष्टिकोण से सक्षमता
धारा 118 बौद्धिक क्षमता के प्रश्न के साथ व्यवहार करती है।
धारा 118 में अधिनियमित नियम, एक नियम है, जो केवल सक्षमता के परीक्षण के रूप में समझने की शक्ति को मान्यता प्रदान करता है।
चूंकि हर एक सामान्य व्यक्ति बातों को समझने और उनके महत्त्व को जानने की बौद्धिक क्षमता रखता है, धारा 118 घोषित करती है कि सभी व्यक्ति जब तक कि वे समझदारी की कमी से दुःखी नहीं है, साक्ष्य देने के लिए सक्षम है।
अतः सक्षमता की विधि वास्तव में असक्षमता की विधि है। एक व्यक्ति सक्षम साक्षी है, जो असक्षम नहीं है।
अतः असक्षमता का अभिप्राय है समझदारी की कमी। यह समझदारी की कमी उद्भूत हो सकती है, इनसे -
(i) कम आयु
(ii) अत्यधिक बुढ़ापा
(iii) शरीर या मन की बीमारी
(iv) इसी प्रकार का कोई अन्य कारण
- टिप्पणीः-
(i) कम आयु या (ii) अत्यधिक बुढ़ापा-परिभाषित नहीं है।
एक 7 वर्ष का लड़का असक्षम नहीं हो सकता वरन् 12 का हो सकता है यदि पहला समझ रखता है जबकि दूसरा नहीं। 60 वर्ष का एक मनुष्य असक्षम हो सकता है और 80 वर्ष का मनुष्य नहीं।
आयु मापदंड नहीं है। मापदंड समझदारी का होना या न होना है।
(iii) शारीरिक बीमारी
एक साक्षी ऐसी अत्यधिक पीड़ा में हो सकता है जिससे कि वह समझने के अयोग्य हो या प्रश्न का उत्तर देने की समझ के योग्य हो। वह मानो एक अचेतनकारी मिरगी, मूर्म या इसी प्रकार से बेहोश हो सकता है। यहां फिर तथ्य का वह एक प्रश्न है कि क्या एक विशेष मामले में शरीर की बीमारी ऐसी है जो कि व्यक्ति को उसकी समझने की शक्ति से वंचित करने वाली हो।
(iii) मानसिक बीमारी -
- यह एक मूढ़मति और एक पागल के मामले का चिंतन करती है, दोनों ही मानसिक बीमारी से ग्रस्त हैं।