367
एक मूढ़मति वह व्यक्ति है, जो अविवेकी, विवेकशक्ति रहित जन्मा है। एक पागल वह व्यक्ति है, जो जन्मा तो विवेकी है, बाद में अविवेकी हो गया है, और अपनी विवेक शक्ति खो चुका है।
एक पागल या तो एकोन्मादी होता है या किसी समय पर उन्मादी होता है। उसके ऐसा होने पर, एक पागल असक्षम नहीं होता है मात्र इसलिए क्योंकि वह एक पागल है। पागलपन का तात्पर्य समझदारी का संपूर्ण उन्मूलन नहीं है। यदि वह सामान्य पागलपन है, वह अंतरालों पर सुबोध हो सकेगा। यदि वह एक एकोन्मादी है, अन्य मामलों के बारे में उसकी समझ स्पष्ट हो सकती है।
दृष्टांत - आंशिक पागलपन का -
पागलखाने में हत्या का विचार-विमर्श।
एक व्यक्ति का उसके पागल मित्र के साथ पागलखाने में साक्षात्कार और उस समय उसकी आलोचना।
दृष्टांत - उन्मादी का -
- आर.वी. हिल-हिल हत्या के लिए अनुवीक्षित किया गया था। डॉनेली साक्षी-पागल-भ्रम से आग्रस्त था कि उसके आसपास 20,000 प्रेत हैं जो उससे निरंतर बात करते रहते हैं।
ऐसा होने पर एक पागल एक सक्षम साक्षी हो सकता है। यह स्पष्टीकरण में मान्यता प्राप्त है।
(iv) कोई अन्य कारण -
इसका अभिप्राय है, एक व्यक्ति को उसकी समझने की शक्ति से वंचित करने का कोई अन्य कारण जैसे - नशे में होना।
इन अयोग्यताओं में किसी कारण के साथ सह-विस्तृणीय है, अतः जब कारण हटा दिया जाता है, साक्षी सक्षम हो जाता है।
जैसे - जब पीड़ा समाप्त हो जाती है।
मदहोशी समाप्त हो जाती है।
पागलपन समाप्त हो जाता है।
अर्थात् साक्षी में समझदारी है या नहीं, एक मामला है जो न्यायालय द्वारा साक्षी से प्रश्न किए जाने से निर्धारित किया जाता है।
एक साक्षी के रूप में अभियुक्त
- वे सभी व्यक्ति जो समझदार हैं, साक्षी के रूप में सक्षम हैं, इस नियम का एक