22 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
यह ऐसे व्यक्ति के बारे में है जो सीमाओं के अंतर्गत या बहिर्गत या तो मौखिक रूप से या लिखित रूप से या किसी अन्य युक्ति में साशय प्रचार करता है या प्रचार करने का प्रयास करता है या किसी प्रकार प्रचार को दुष्प्रेरित करता है।
(अ) कोई राजद्रोहात्मक विषय अर्थात् कोई विषय जिसका प्रकाशन धारा 174 अ.
भा.दं.सं. के अधीन दंडनीय है।
(ब) कोई भी विषय जिसका प्रकाशन धारा 153-ए भा.दं.सं. के अन्तर्गत दंडनीय
है। या
(स) न्यायाधीश से संबंधित कोई विषय जो भारतीय दंड संहिता के अधीन दंडनीय
अभित्रास या मानहानि के समान हो।
ऐसा मजिस्ट्रेट यदि उसकी राय में कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार है, उस व्यक्ति से कारण बताने की अपेक्षा कर सकता है कि एक वर्ष से अनाधिक समय के लिए जैसा मजिस्ट्रेट नियम करने को उपयुक्त समझे, भूतियों के सहित या बिना बंधपत्र निष्पादित करने के आदेश क्यों न दे।
टिप्पण -
किसी भी उपाय से जैसे ग्रामोफोन के रिकॉर्डों द्वारा।
साशय निर्दोष अभिकर्ताओं एवं अबोध कार्यकर्ताओं अर्थात् पत्रों के लड़कों
एवं दूसरों को जो केवल उठाई-धराई का काम करते हैं, अपवर्जित करेंगे।
- लिखना नहीं वरन् प्रचार आवश्यक है। जब मामला समाचार पत्र के द्वारा
प्रचारित किया जाता है तो संपादक, स्वामी, मुद्रक या प्रकाशक के विरुद्ध
स्थानीय सरकार के आदेश के अतिरिक्त कोई अन्य कार्यवाही प्रक्रिया नहीं
की जाएगी।
धाराएं 109 एवं 110 खतरनाक चरित्रों के संदर्भ में व्यवहार।
धारा 109 निम्नोक्त व्यक्तियों के संदर्भ में व्यवहार करती है।
(अ) मजिस्ट्रेट की स्थानीय सीमाओं के अंतर्गत अपनी उपस्थिति को छुपाने के लिए
सावधानी बरतने वाला व्यक्ति और यह विश्वास करने का कारण कि ऐसा
व्यक्ति ऐसे पूर्वोपाय कोई अपराध करने के दृष्टिकोण से कर रहा है।
(ब) व्यक्ति जो अपनी जीविका के प्रकट साधन नहीं रखता है या जो अपने विषय
में संतोषजनक परिकलन नहीं देता है।
इन वादों में बंध पत्र एक वर्ष के लिए हो सकता हैः-
(1) छिपाना अपराध कारित करने की दृष्टि से हो।
(2) जीविका के प्रकट साधन।
धनहीन या बिना धंधे के होना जीवनयापन के प्रकट साधन बिना होना नहीं है।
53 कलकत्ता 347 विक्टर बनाम सम्राट