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धारा 110 आभ्यासिक अपराधियों के निम्नलिखित विषयों के बारे में है।
(1) अभ्यासतः लूट करने वाला, सेंध मारने वाला चोर या कूटकारी या
(2) अभ्यासतः चोरी की संपत्ति, यह जानते हुए कि वह चोरी की संपत्ति है, को प्राप्त करने वाला या
(3) अभ्यासतः चोरों को रक्षित करता या ठहराता है या चोरी की संपत्ति के संगुप्तन या विक्रय में सहायता करता है, या
(4) आभ्यासिक अपराधियों की दशा में बंधपत्र 3 वर्षों के लिए हो
धारा 121
ऐसे व्यक्तियों को शांति बनाए रखने या अच्छा व्यवहार करने को बाध्य करने की अंगीकृत विधा, उनसे शांति रखने या सदाचार के लिए प्रतिभूति की मांग एक निश्चित समयावधि के लिए करना है।
शांति बनाए रखने या सदाचार के बीच बंधपत्र का अंतर।
- शांति रखने का बंधपत्र, किसी अपराध के करने से सहमत नहीं होगा। किन्तु
केवल ऐसे अपराध के करने से जिससे परिणामतः शांति होना संभाव्य है।
- अच्छे व्यवहार के लिए किया गया बंधपत्र किसी कारावास के दंडनीय
अपराध के किए जाने पर समहृत हो जाता है।
बंधपत्र-भंग पर प्रक्रिया। जब कोई व्यक्ति अपराध के लिए दंडित होने से बंधपत्र समहृत कर देता है तो समहृत बंधपत्र की रकम वसूली जा सकती है, किन्तु उसे तुरन्त बंधपत्र के अव्यतीत काल के कारण कारावास नहीं भेजा जा सकता है। मजिस्ट्रेट का उपचार इस अध्याय के अधीन नवीन कार्यवाही करना है।
मजिस्ट्रेट द्वारा, पुनर्संज्ञान को भंग करने वाले अभियुक्त पक्ष को उन साक्षियों का जिसके साक्ष्य पर कारण बताओ न्यायादेश द्वारा जारी किया गया है, का प्रतिपरीक्षण करने का अवसर दिए बिना समहृत किया जाना न्यायोचित कार्यवाही नहीं है।
प्रतिभूति जमानत सहित या जमानत बिना एक वैयक्तिक प्रतिभूति हो सकती है।
मजिस्ट्रेट को प्रतिभूतियों के वर्ग को परिभाषित करने का अधिकार है, अर्थात् भूमिधारक आदि।
धारा 122
मजिस्ट्रेट किसी भी प्रतिभूति को स्वीकृत करने से इंकार कर सकता है या उसके या उसके पूर्वाधिकारी द्वारा पूर्व में स्वीकृत किसी प्रतिभूति को इस आधार पर निरस्त कर सकता है कि बंधपत्र के प्रयोजन के लिए ऐसा प्रतिभूति अनुपयुक्त व्यक्ति है।
उपयुक्ता के बारे में जांच भी होनी होती है।
योग्यता की परीक्षा यह है कि क्या प्रतिभू जिसके लिए उसने प्रतिबद्धता की है, उस